भारतीय एस्‍ट्रोनॉट्स के लिए बायोमेडिकल रिसर्च करेंगे ISRO और AIIMS !

अंतरिक्ष की सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण का मानव शरीर पर क्या असर होता है? गगनयात्रियों की सुरक्षा और भविष्य के भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए ISRO और AIIMS मिलकर 'स्पेस मेडिसिन' पर शोध करेंगे।

भारतीय एस्‍ट्रोनॉट्स के लिए बायोमेडिकल रिसर्च करेंगे ISRO और AIIMS !

ISRO और AIIMS का ऐतिहासिक समझौता: अंतरिक्ष में भारतीय एस्ट्रोनॉट्स की सेहत पर होगा बड़ा रिसर्च

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' (Gaganyaan) की तैयारी अब एक नए और महत्वपूर्ण चरण में पहुँच गई है। भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (Gaganyatris) को अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितियों में सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) और AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान), नई दिल्ली ने हाथ मिलाया है।

हाल ही में (मार्च 2026) दोनों संस्थानों के बीच एक Framework MoU पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य 'स्पेस मेडिसिन' (Space Medicine) और बायोमेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।

इस रिसर्च के मुख्य उद्देश्य

अंतरिक्ष का वातावरण पृथ्वी से बिल्कुल अलग होता है। वहाँ गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) न होने के कारण मानव शरीर में कई बदलाव आते हैं। ISRO और AIIMS का यह साझा प्रयास निम्नलिखित क्षेत्रों पर केंद्रित होगा:

  1. मस्कुलोस्केलेटल हेल्थ (Musculoskeletal Health): शून्य गुरुत्वाकर्षण में रहने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं (Muscle Atrophy)। AIIMS के विशेषज्ञ यह अध्ययन करेंगे कि इन्हें कैसे रोका जाए।

  2. हृदय और रक्त परिसंचरण (Cardiovascular Studies): अंतरिक्ष में शरीर के तरल पदार्थ (जैसे रक्त) सिर की ओर बढ़ने लगते हैं। इस 'फ्लुइड शिफ्ट' और हृदय प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव का शोध किया जाएगा।

  3. व्यवहार और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य (Behavioral Health): अंतरिक्ष के बंद वातावरण (Isolated Environment) में एस्ट्रोनॉट्स के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार पर होने वाले असर का अध्ययन।

  4. गट माइक्रोबायोम और इम्यूनोलॉजी: अंतरिक्ष यात्रा के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन तंत्र (Gut Health) में होने वाले बदलावों की जांच।

  5. स्पेस इमरजेंसी मेडिसिन: अंतरिक्ष में अगर कोई स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति पैदा होती है, तो उसका इलाज कैसे किया जाए, इसके लिए विशेष प्रोटोकॉल और उपकरण विकसित किए जाएंगे।

आम जनता को क्या फायदा होगा?

AIIMS के निदेशक के अनुसार, यह रिसर्च केवल अंतरिक्ष यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगी। अंतरिक्ष में होने वाली शारीरिक प्रक्रियाएं अक्सर 'त्वरित उम्र बढ़ने' (Accelerated Aging) जैसी होती हैं। ऐसे में इस रिसर्च से निकलने वाले नतीजे धरती पर रहने वाले बुजुर्गों, ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की बीमारी) के मरीजों और हृदय रोगियों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं।

"यह सहयोग हमें 'एस्केप वेलोसिटी' (Escape Velocity) प्रदान करेगा ताकि हम स्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकें और मानवता के काम आ सकें।" - डॉ. एम. श्रीनिवास (निदेशक, AIIMS दिल्ली)

भविष्य की तैयारी: भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन 

यह रिसर्च न केवल गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के भविष्य के लक्ष्यों—जैसे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) और चंद्रमा पर मानव मिशन—के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी।