ऐतिहासिक फैसला;गुजरात वायर-फ्री सिटी मिशन' की शुरुआत !

सड़कों पर न खंभे होंगे, न हवा में लटकते तार! गुजरात सरकार का बड़ा कदम, शहरों को 'वायर-फ्री' बनाने का संकल्प।

ऐतिहासिक फैसला;गुजरात वायर-फ्री सिटी मिशन' की शुरुआत !

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के शहरी विकास को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। सरकार ने 'गुजरात वायर-फ्री सिटी मिशन' (Gujarat Wire-Free City Mission) की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य राज्य के शहरों को तारों के जंजाल से मुक्त कर उन्हें अधिक सुरक्षित, आधुनिक और सुंदर बनाना है।

'गुजरात वायर-फ्री सिटी मिशन' के मुख्य बिंदु

गुजरात सरकार ने इस प्रोजेक्ट को अपने 'विकसित गुजरात @2047' और 'स्मार्ट व सेफ सिटी विजन' के साथ जोड़ा है। इसके तहत शहरों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढाला जाएगा।

1. बजट और वित्तीय आवंटन

  • राज्य सरकार ने इस मिशन के शुरुआती क्रियान्वयन के लिए ₹500 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है।

  • इस योजना को केंद्र सरकार की RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme) और राज्य सरकार की रोबस्ट योजना के तहत जोड़ा गया है।

2. कवरेज और दायरा

  • इस मिशन के तहत राज्य के 17 महानगरपालिकाओं (Municipal Corporations) और प्रमुख नगरपालिका क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।

  • पूरे गुजरात में लगभग 31,000 किलोमीटर लंबा ओवरहेड बिजली और अन्य केबलों का नेटवर्क है, जिसे चरणबद्ध तरीके (Phase-wise) से पूरी तरह भूमिगत (Underground) किया जाएगा।

3. पहले चरण का लक्ष्य

  • मिशन के पहले चरण में 11 KV (किलोवोल्ट) के हाई-टेंशन बिजली नेटवर्क को अंडरग्राउंड केबलिंग में बदला जाएगा।

  • इसके बाद, अन्य प्रकार के ओवरहेड इंटरनेट केबल, टेलीफोन लाइन और टीवी केबलों को भी जमीन के अंदर शिफ्ट किया जाएगा।

इस मिशन के मुख्य उद्देश्य और लाभ

  • शहरी सौंदर्य में सुधार (Urban Aesthetics): शहरों में लटकते और उलझे हुए तारों का जंजाल खत्म होने से 'विजुअल पॉल्यूशन' (दृश्य प्रदूषण) कम होगा और शहर साफ-सुथरे नजर आएंगे।

  • सार्वजनिक सुरक्षा और दुर्घटनाओं में कमी: तेज हवा, बारिश या चक्रवात के दौरान अक्सर तार टूटने से बड़े हादसे हो जाते हैं। अंडरग्राउंड केबलिंग से करंट लगने या शॉर्ट-सर्किट की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगेगी।

  • अबाधित बिजली आपूर्ति: प्राकृतिक आपदाओं (जैसे तूफान या भारी बारिश) के समय बिजली के खंभे गिरने से पूरी बिजली ठप हो जाती है। तार जमीन के नीचे होने से ऐसी आपदाओं के समय भी बिना किसी रुकावट के बिजली सप्लाई जारी रहेगी।

  • बेहतर ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कों के किनारे लगे बिजली के खंभे हटने से सड़कों को चौड़ा करने और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाने में मदद मिलेगी।

अन्य महत्वपूर्ण फैसला: इस कैबिनेट बैठक में शहरों को वायर-फ्री बनाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता के लिए 'मुख्यमंत्री निर्मल ग्राम योजना' के बजट में भी भारी बढ़ोतरी की गई है, ताकि गांवों को भी कचरा मुक्त बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का यह फैसला गुजरात के शहरी नियोजन (Urban Planning) के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो राज्य को ग्लोबल स्टैंडर्ड के शहरों की कतार में खड़ा करेगा।