आसमान में नया पहरेदार, भारत बना मिसाइल डिफेंस का महारथी !
दुश्मन चाहे जितनी दूर से वार करे, भारत का सुरक्षा कवच अब हर मिसाइल को मिट्टी में मिलाने के लिए तैयार है। यह तकनीक हासिल करने वाला भारत दुनिया का 5वां देश बना!
भारतीय मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का सफल परीक्षण: भारत की सुरक्षा में ऐतिहासिक मील का पत्थर
भारत ने अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारत के स्वदेशी मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का एक और सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो गया है, जिनके पास दुश्मन की लंबी दूरी की मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की अचूक क्षमता है।
5000 किलोमीटर दूर से आती मिसाइल भी होगी ढेर
इस डिफेंस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी रेंज और मारक क्षमता है। यह सिस्टम 5000 किलोमीटर दूर से आ रही किसी भी दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल को ट्रैक करके, हवा में ही इंटरसेप्ट (रोकने) और नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर कोई दुश्मन देश भारत की तरफ लंबी दूरी की न्यूक्लियर या पारंपरिक मिसाइल दागता है, तो यह सिस्टम उसे भारत की सीमा में दाखिल होने से पहले ही आसमान में धूल चटा देगा।
तकनीक हासिल करने वाला दुनिया का 5वां देश
इस बेहद जटिल और आधुनिक तकनीक को विकसित करके भारत ने वैश्विक स्तर पर अपना लोहा मनवाया है। बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस तकनीक को पूरी तरह विकसित और तैनात करने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन गया है। इससे पहले यह सुरक्षा कवच केवल अमेरिका, रूस, इजरायल और चीन के पास ही उपलब्ध था। यह सफलता भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण के संकल्प को बेहद मजबूत करती है।
कैसे काम करता है यह मल्टी-लेयर्ड सिस्टम?
भारत का यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम मुख्य रूप से दो स्तरों (Layers) पर काम करता है, जो इसे पूरी तरह अभेद्य बनाते हैं:
-
एक्सो-एटमॉस्फेरिक (Exo-Atmospheric) सिस्टम: यह सिस्टम दुश्मन की मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर (अंतरिक्ष में) ही निशाना बनाता है। अगर मिसाइल बहुत लंबी दूरी की है, तो उसे ऊपरी आकाश में ही नष्ट कर दिया जाता है।
-
एंडो-एटमॉस्फेरिक (Endo-Atmospheric) सिस्टम: यदि कोई मिसाइल पहले घेरे को चकमा देकर वायुमंडल के अंदर प्रवेश कर जाती है, तो यह दूसरा स्तर सक्रिय हो जाता है। यह कम ऊंचाई (वायुमंडल के भीतर) पर दुश्मन की मिसाइल को ढूंढकर उसे खत्म कर देता है।
इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए बेहद एडवांस रडार नेटवर्क, अर्ली वार्निंग सिस्टम (जल्द चेतावनी देने वाले सिस्टम), और पूरी तरह से ऑटोमेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर एक साथ पलक झपकते ही काम करते हैं।
भारत के लिए क्यों जरूरी है यह कामयाबी?
रणनीतिक रूप से यह परीक्षण भारत की सुरक्षा के लिहाज से एक गेम-चेंजर है। भारत के पड़ोसी देशों के पास परमाणु क्षमता से लैस बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा है। ऐसे माहौल में, यह डिफेंस सिस्टम देश के प्रमुख शहरों, परमाणु ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों (Infrastructure) को किसी भी संभावित मिसाइल हमले से पूरी तरह सुरक्षित रखेगा। यह भारत की 'नो फर्स्ट यूज' (परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल न करने) की नीति को भी मजबूती देता है, क्योंकि अब भारत पर हमला करने से पहले दुश्मन को सौ बार सोचना पड़ेगा।
Matrimonial

BRG News 


