SC की फटकार के बाद झुकी सरकार ? सोनम वांगचुक होंगे रिहा !
सरकार ने सोनम वांगचुक पर लगा NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) हटाया। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की अनुपस्थिति और मामले में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अब 17 मार्च की सुनवाई से पहले यह बड़ा फैसला आया है।
Sonam Wangchuk Release: करीब 170 दिनों बाद जेल से बाहर आएंगे सोनम वांगचुक, केंद्र सरकार ने वापस लिया NSA
लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने शनिवार (14 मार्च 2026) को एक बड़ा निर्णय लेते हुए उन पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत के आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
वांगचुक पिछले लगभग 6 महीनों (170 दिनों) से राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद थे। उनकी रिहाई का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई से ठीक पहले आया है।
सरकार ने क्यों वापस ली हिरासत?
गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाना चाहती है ताकि सभी हितधारकों (Stakeholders) के साथ सार्थक बातचीत की जा सके। सरकार ने स्पष्ट किया कि:
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लद्दाख की जनता की आकांक्षाओं को संबोधित करने के लिए संवाद जरूरी है।
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लगातार बंद और विरोध प्रदर्शनों से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और छात्रों के भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा था।
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सोनम वांगचुक अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और 'Solicitor General' पर टिप्पणी
सोनम वांगचुक की हिरासत को उनकी पत्नी गीतांजलि अंग्मो ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले की पिछली सुनवाईयों में कोर्ट का रुख काफी सख्त रहा:
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सुनवाई में देरी पर नाराजगी: सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले) ने मामले के बार-बार खिंचने और सॉलिसिटर जनरल (Tushar Mehta) की अनुपस्थिति पर गहरी नाराजगी जताई थी।
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'गलत संकेत' की चेतावनी: वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि बार-बार स्थगन (Adjournments) से पूरे देश में गलत संदेश जा रहा है, खासकर जब मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) से जुड़ा हो।
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बयानों की व्याख्या: कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि शायद अधिकारी वांगचुक के बयानों का जरूरत से ज्यादा गंभीर अर्थ निकाल रहे हैं।
क्या था मामला?
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लेह से हिरासत में लिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने लद्दाख को 'छठी अनुसूची' (6th Schedule) और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों को भड़काया था। सरकार ने उन पर NSA लगाते हुए उन्हें 'सार्वजनिक व्यवस्था' के लिए खतरा बताया था।
अब आगे क्या?
हालांकि सरकार ने उनकी हिरासत रद्द कर दी है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है:
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17 मार्च को अगली सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होनी तय है।
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अंतिम फैसला: कोर्ट ने पहले ही साफ कर दिया था कि 17 मार्च को वह सरकार के जवाब सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लेगा। अब रिहाई के बाद यह देखना होगा कि कोर्ट इस मामले को किस दिशा में ले जाता है।
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