NASA मून बेस: पूरा प्लान
नासा (NASA) ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक स्थायी इंसानी बेस बनाने की ऐतिहासिक योजना का एलान किया है, जो भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों और मंगल ग्रह की यात्रा के लिए एक मुख्य केंद्र के रूप में काम करेगा।
NASA का बड़ा एलान: चांद पर बनेगा इंसानी बेस, 26 मई को लाइव इवेंट में सामने आएगा पूरा ब्लूप्रिंट
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA (नासा) ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए चांद पर एक स्थायी इंसानी बेस (Moon Base) बनाने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। यह मून बेस केवल अंतरिक्ष यात्रियों के रहने का ठिकाना नहीं होगा, बल्कि भविष्य के लंबे वैज्ञानिक मिशनों, व्यावसायिक गतिविधियों और मंगल ग्रह (Mars) पर भेजे जाने वाले पहले मानव मिशनों के लिए लॉन्च पैड की तरह काम करेगा।
नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए लिखा:
"हम मून बेस बना रहे हैं! @NASAMoonBase एक ऐसे आवास (Habitat) के रूप में काम करेगा जहां अंतरिक्ष यात्री लंबे समय के वैज्ञानिक मिशनों के दौरान रहेंगे और काम करेंगे।"
इस महा-मिशन से जुड़ी सभी नई योजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप और नए वैश्विक पार्टनर्स का खुलासा करने के लिए नासा 26 मई को दोपहर 2:00 बजे (ET) यानी भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे एक लाइव न्यूज इवेंट आयोजित करने जा रहा है।
कब और कहां देख सकेंगे लाइव इवेंट?
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तारीख: 26 मई
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समय: दोपहर 2:00 बजे ET (भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे)
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कहां देखें: इस इवेंट का सीधा प्रसारण NASA+ ऐप और नासा के आधिकारिक YouTube चैनल पर लाइव किया जाएगा।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जारेड इसाकमैन (Jared Isaacman), एक्सप्लोरेशन सिस्टम्स डेवलपमेंट की लोरी ग्लेज (Lori Glaze) और मून बेस प्रोग्राम के एग्जीक्यूटिव कार्लोस गार्सिया-गलान (Carlos García-Galán) मुख्य रूप से शामिल होंगे।
चांद के साउथ पोल (दक्षिणी ध्रुव) पर ही क्यों बनेगा बेस?
नासा का यह मून बेस चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (Lunar South Pole) पर बनाया जाएगा। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण हैं:
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बर्फ और पानी की मौजूदगी: दक्षिणी ध्रुव के गहरे गड्ढों (Craters) में भारी मात्रा में जमी हुई बर्फ होने की संभावना है। इसे प्रोसेस करके पीने के पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन (हाइड्रोजन) में बदला जा सकता है।
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संसाधनों का इस्तेमाल: इसे In-situ Resource Utilization (ISRU) कहा जाता है, यानी चांद के संसाधनों का इस्तेमाल कर वहीं इंसानी बस्तियां बसाना, जिससे पृथ्वी से सामान ले जाने का खर्च और निर्भरता कम हो सके।
3 चरणों में पूरा होगा 'मून बेस' का खाका (Blueprint)
नासा ने इस पूरे मिशन को एक चरणबद्ध रणनीति (Phased Strategy) के तहत तैयार किया है, जिसमें कुल 81 लॉन्च और 73 लूनर लैंडिंग्स की योजना है:
चरण 1 (Phase 1) - शुरुआती पहुंच और परीक्षण: इस चरण का मुख्य फोकस चांद की सतह तक सुरक्षित पहुंच बनाना, बेस्ट लैंडिंग साइट्स की पहचान करना और शुरुआती हैबिटेशन टेक्नोलॉजी का परीक्षण करना है। इसके तहत 25 लॉन्च और 21 लैंडिंग्स की जाएंगी, जिसके जरिए लगभग 4,000 किलोग्राम पेलोड चांद पर भेजा जाएगा। इसी के साथ पहले क्रू मून बेस मिशन की शुरुआत होगी।
चरण 2 (Phase 2) - इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: इस चरण में चांद पर बुनियादी ढांचे का निर्माण और परिचालन क्षमताओं को बड़ा रूप दिया जाएगा। इसके लिए 27 लॉन्च और 24 लैंडिंग्स तय की गई हैं, जिसके तहत लगभग 60,000 किलोग्राम पेलोड भेजा जाएगा। नासा की योजना हर छह महीने में मानव मिशन भेजने और चांद की मिट्टी (Regolith) से ही निर्माण कार्य शुरू करने की है।
चरण 3 (Phase 3) - पूर्ण परिचालन (Fully Operational Base): यह अंतिम चरण एक पूरी तरह कार्यात्मक मून बेस तैयार करने के लिए समर्पित होगा, जहां इंसान लगातार लंबे समय तक मौजूद रह सकें। इसमें 29 लॉन्च और 28 लैंडिंग्स शामिल हैं, जिसके जरिए लगभग 1,500,000 किलोग्राम भारी-भरकम पेलोड भेजा जाएगा। साथ ही, कमर्शियल लूनर पेलोड सर्विसेज (CLPS) की क्षमता को बढ़ाकर 8 मीट्रिक टन तक किया जाएगा।
चुनौतियां भी हैं कम नहीं
चांद पर इंसानी बेस बनाना किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि वहां का माहौल बेहद खतरनाक है। अंतरिक्ष यात्रियों और नासा के रोबोटिक सिस्टम को चांद की लंबी और बेहद ठंडी रातों (जो पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होती हैं) का सामना करना होगा। इसके अलावा गहरे गड्ढों की ढलानों पर भारी उपकरणों को ले जाना और अत्यधिक रेडिएशन से खुद को बचाना इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
नासा का यह Artemis (आर्टेमिस) प्रोग्राम और मून बेस प्रोजेक्ट विज्ञान और तकनीक के एक नए 'स्वर्ण युग' (Golden Age) की शुरुआत है, जो इंसानों को मल्टी-प्लेनेटरी स्पीशीज (कई ग्रहों पर रहने वाली प्रजाति) बनाने की दिशा में सबसे मजबूत कदम साबित होगा।
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