टैरिफ के अरबों डॉलर वापस लौटाने जा रहे ट्रंप, क्या भारत का भी इसमें होगा हिस्सा ?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ट्रंप प्रशासन $166 बिलियन का टैरिफ रिफंड शुरू कर रहा है, जिससे भारत के टेक्सटाइल और जेम्स-ज्वैलरी निर्यातकों को करोड़ों का लाभ होगा।
यह खबर व्यापार जगत में बड़ी हलचल पैदा कर रही है। हालिया घटनाक्रमों के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने 166 अरब डॉलर (लगभग 13.8 लाख करोड़ रुपये) का टैरिफ रिफंड शुरू करने की प्रक्रिया अपनाई है।
1. मामला क्या है?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कुछ आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ (विशेष रूप से IEEPA - International Emergency Economic Powers Act के तहत) संवैधानिक रूप से सही नहीं थे। इस फैसले के बाद, अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) विभाग ने 20 अप्रैल 2026 से एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है, जिसके माध्यम से वे कंपनियां रिफंड का दावा कर सकती हैं जिन्होंने ये भारी शुल्क चुकाए थे।
2. क्या भारत को इसका फायदा मिलेगा?
इसका सीधा जवाब है: हां, भारतीय निर्यातकों और अमेरिकी आयातकों को इसका बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
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भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ में कटौती: फरवरी 2026 में हुए एक द्विपक्षीय समझौते के तहत, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था। साथ ही, रूसी तेल की खरीद से जुड़े 25% अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क को भी हटा दिया गया था।
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पुराने भुगतान की वापसी: जिन भारतीय निर्यातकों या उनके अमेरिकी साझेदारों ने 2025 और 2026 के बीच वह 'अतिरिक्त' दंडात्मक शुल्क भरा था, वे अब इस 166 अरब डॉलर के पूल से अपना हिस्सा वापस पाने के हकदार हैं।
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प्रमुख क्षेत्र: इस रिफंड और टैरिफ कटौती का सबसे अधिक लाभ टेक्सटाइल (कपड़ा), रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery), चमड़ा उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान को मिलेगा, क्योंकि इन पर सबसे अधिक ड्यूटी लगाई गई थी।
3. रिफंड की प्रक्रिया और चुनौतियां
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किसे मिलेगा पैसा? रिफंड सीधे उन कंपनियों को दिया जाएगा जिन्होंने आयात के समय टैक्स का भुगतान किया था। लगभग 56,000 से अधिक कंपनियां इस रिफंड के लिए पहले ही रजिस्ट्रेशन करा चुकी हैं।
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कितना समय लगेगा? दावा मंजूर होने के बाद पैसा वापस आने में 60 से 90 दिन का समय लग सकता है।
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील: इस रिफंड के साथ-साथ, ट्रंप और पीएम मोदी के बीच हुए नए समझौते ने भारतीय बाजारों के लिए अमेरिकी ऊर्जा और तकनीक के रास्ते खोले हैं, जबकि भारतीय सामानों के लिए अमेरिकी बाजार फिर से प्रतिस्पर्धी हो गया है।
यह रिफंड केवल पैसा वापस मिलना नहीं है, बल्कि यह भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में आए तनाव के खत्म होने का संकेत है। भारतीय निर्यातकों के लिए यह 'कैश लिक्विडिटी' बढ़ाने वाला कदम साबित होगा, जिससे वैश्विक बाजार में उनकी स्थिति मजबूत होगी।
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