मुश्किल वक्त में मिली बड़ी संजीवनी: राजकोषीय घाटे को थामने के लिए RBI भरेगा सरकार की तिजोरी
कमजोर रुपये और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, आरबीआई द्वारा सरकार को ₹2.86 लाख करोड़ का रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर करना देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी संजीवनी है।
डूबते रुपये और महंगे तेल के बीच RBI भरेगा सरकार की तिजोरी: ₹2,86,588.46 करोड़ का रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मुंबई में हुई RBI केंद्रीय बोर्ड की 623वीं बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया।
संकट के समय सरकार के लिए बड़ी संजीवनी क्यों?
वर्तमान समय में भारतीय अर्थव्यवस्था दोतरफा दबाव का सामना कर रही है:
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महंगा तेल और बढ़ता आयात बिल: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, इसलिए देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खर्च हो रहा है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने का खतरा है।
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कमजोर होता रुपया: विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे आयात के कारण रुपये पर लगातार दबाव है।
ऐसे समय में RBI का यह फंड सरकार को बिना अतिरिक्त कर्ज लिए देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और लोक कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने की बड़ी आजादी देगा।
RBI को कैसे हुई इतनी बंपर कमाई?
कहावत है कि "आपदा में भी अवसर होता है", और RBI के वित्तीय नतीजों में यह साफ दिखता है। केंद्रीय बैंक की इस रिकॉर्ड कमाई के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण रहे हैं:
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डॉलर की भारी बिक्री (Forex Intervention): गिरते रुपये को संभालने और उसे एक सीमित दायरे में रखने के लिए RBI ने इस साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़े पैमाने पर डॉलर बेचे।
डॉलर को ऊंचे दामों पर बेचने से केंद्रीय बैंक को मोटा मुनाफा हुआ। -
विदेशी संपत्तियों पर ऊंचा ब्याज: वैश्विक स्तर पर (विशेषकर अमेरिका में) ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
इसके चलते RBI ने विदेशों में जो अपनी विदेशी मुद्रा और संपत्तियां (Foreign Assets) निवेश कर रखी हैं, उन पर उसे भारी ब्याज और रिटर्न मिला है।
RBI का वित्तीय रिपोर्ट कार्ड (FY 2025-26)
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कुल शुद्ध आय (Net Income): जोखिम प्रावधानों से पहले केंद्रीय बैंक की कुल शुद्ध आय बढ़कर ₹3,95,972.10 करोड़ रही, जो पिछले साल ₹3,13,455.77 करोड़ थी।
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सकल आय में वृद्धि (Gross Income): पिछले साल के मुकाबले RBI की सकल आय में 26.42% का शानदार उछाल देखा गया।
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बैलेंस शीट का विस्तार: 31 मार्च 2026 तक रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट 20.61% बढ़कर ₹91.97 लाख करोड़ पर पहुंच गई है।
अपनी सुरक्षा का भी रखा पूरा ध्यान (Contingency Risk Buffer)
इतना बड़ा फंड सरकार को ट्रांसफर करने के बावजूद RBI ने अपनी वित्तीय सुरक्षा और साख से कोई समझौता नहीं किया है।
राजकोषीय घाटे को थामने में मिलेगी मदद
इस रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर से केंद्र सरकार को अपने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को काबू में रखने में बहुत मदद मिलेगी।
इस विषय पर और अधिक विस्तार से वित्तीय आंकड़ों और पृष्ठभूमि को समझने के लिए आप इस वीडियो को देख सकते हैं:
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