LPG Crisis 2026: भारत की क्या है तैयारी ?
देश में करीब 33 करोड़ गैस कनेक्शनों के बीच अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे निपटने के लिए सरकार ने उत्पादन बढ़ाने और 25 दिनों के अंतराल पर बुकिंग जैसे नए नियम लागू किए हैं।
देश में कुल कितने गैस सिलेंडर ? LPG संकट की खबरों के बीच यहाँ जानें ताज़ा आंकड़े
मध्य-पूर्व के देशों में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति को लेकर आम जनता में चिंता देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर गैस की कमी और कीमतों को लेकर कई तरह की खबरें वायरल हो रही हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि भारत में गैस उपभोक्ताओं की वास्तविक संख्या क्या है और सरकार इस संभावित संकट से निपटने के लिए क्या तैयारी कर रही है।
भारत में LPG कनेक्शन का ताज़ा गणित
भारत आज दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ रसोई गैस की पहुँच सबसे अधिक है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल घरेलू एलपीजी कनेक्शनों की संख्या 33 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) की रही है, जिसके तहत अब तक 10.56 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं।
देश भर में गैस वितरण का जाल इतना मजबूत है कि रोजाना लगभग 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर उपभोक्ताओं के घरों तक पहुँचाए जा रहे हैं। भारत अपनी सालाना जरूरत का करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी इस्तेमाल करता है।
क्यों हो रही है एलपीजी संकट की चर्चा?
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर युद्ध की स्थिति बनने के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उछाल आया है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। मार्च 2026 में घरेलू सिलेंडर की कीमतों में करीब 60 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सरकार ने उठाए सख्त कदम
गैस की किल्लत न हो, इसके लिए सरकार और तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने रणनीतिक बदलाव किए हैं।
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उत्पादन में तेजी: घरेलू रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे अपना एलपीजी उत्पादन बढ़ाएं। वर्तमान में घरेलू उत्पादन में 28 प्रतिशत की वृद्धि की गई है ताकि आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके।
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बुकिंग का नया नियम: जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने एक नया नियम लागू किया है। अब उपभोक्ता अपने पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के 25 दिनों के बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर पाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि लोग डर के मारे पैनिक बुकिंग न करें।
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कमर्शियल उपयोग पर नजर: औद्योगिक और कमर्शियल सेक्टर में गैस की खपत को सीमित कर उसे घरेलू रसोई की ओर मोड़ा जा रहा है।
क्या आपको चिंता करनी चाहिए?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश में गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। आपूर्ति में कुछ देरी भौगोलिक तनाव की वजह से हो सकती है, लेकिन "गैस खत्म होने" जैसी कोई स्थिति फिलहाल नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं को केवल अपनी जरूरत के अनुसार ही बुकिंग करनी चाहिए और अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
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