गुजरात से राजस्थान तक, 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान !
भारतीय निर्वाचन आयोग ने गुजरात और राजस्थान सहित 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर 18 जून 2026 को होने वाले चुनावों का ऐलान कर दिया है। इस चुनाव में कई दिग्गज नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिससे राज्यों का सियासी समीकरण बेहद दिलचस्प हो गया है।
भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज करते हुए राज्यसभा चुनावों का बड़ा ऐलान कर दिया है। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के मुताबिक, गुजरात और राजस्थान समेत देश के कुल 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव (Biennial Elections) कराए जा रहे हैं। उच्च सदन की इन सीटों पर होने वाला यह मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि इसमें कई राजनीतिक दिग्गजों की साख दांव पर लगी है।
जानिए कब और कैसे होगी वोटिंग (पूरा शेड्यूल)
चुनाव आयोग ने इन 24 सीटों पर चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा करने के लिए तारीखों की घोषणा कर दी है, जो कि इस प्रकार हैं:
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अधिसूचना (Notification) जारी होने की तारीख: 1 जून 2026
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नामांकन करने की अंतिम तारीख: 8 जून 2026
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नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny): 9 जून 2026
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नाम वापस लेने की आखिरी तारीख: 11 जून 2026
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मतदान (Voting) की तारीख: 18 जून 2026
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वोटिंग का समय: सुबह 9:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे तक
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मतगणना (Counting of Votes): 18 जून 2026 (वोटिंग खत्म होने के ठीक बाद, यानी शाम 5:00 बजे से ही वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी और रात तक नतीजे साफ हो जाएंगे)
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चुनावी प्रक्रिया पूरी होने की अंतिम तिथि: 20 जून 2026
किन 10 राज्यों में कितनी सीटें हैं खाली?
इस चुनावी प्रक्रिया के तहत देश के 10 अलग-अलग राज्यों से कुल 24 सांसदों का चुनाव किया जाना है। राज्यों के हिसाब से खाली सीटों का विवरण नीचे दिया गया है:
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आंध्र प्रदेश: 4 सीटें
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गुजरात: 4 सीटें
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कर्नाटक: 4 सीटें
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राजस्थान: 3 सीटें
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मध्य प्रदेश: 3 सीटें
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झारखंड: 2 सीटें
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अरुणाचल प्रदेश: 1 सीट
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मणिपुर: 1 सीट
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मेघालय: 1 सीट
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मिजोरम: 1 seat
इन मुख्य सीटों के अलावा, कुछ अन्य राज्यों में हाल ही में हुए इस्तीफों के कारण खाली हुई सीटों पर उपचुनाव (By-Elections) भी इसी दौरान संपन्न कराए जाएंगे।
राज्यों का सियासी समीकरण और वोटों का गणित
राज्यसभा चुनाव में जनता सीधे वोट नहीं देती, बल्कि राज्यों के विधायक (MLA) अपने पसंदीदा उम्मीदवार को चुनते हैं। यही वजह है कि जिस पार्टी के पास राज्य की विधानसभा में जितने ज्यादा विधायक होते हैं, उसके उम्मीदवार की जीत उतनी ही पक्की मानी जाती है।
गुजरात का समीकरण: गुजरात की कुल 182 विधानसभा सीटों में से भाजपा के पास 156 विधायकों का प्रचंड बहुमत है। यहाँ एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को लगभग 38 विधायकों के समर्थन (वोट) की आवश्यकता होगी। संख्या बल के इस भारी अंतर के कारण यहाँ भाजपा का पलड़ा बेहद मजबूत दिखाई दे रहा है और उसे एक अतिरिक्त (सरप्लस) सीट का फायदा भी हो सकता है।
राजस्थान का समीकरण: राजस्थान की 3 सीटों पर होने वाला मुकाबला भी दिलचस्प है। यहाँ भारतीय जनता पार्टी के पास 115 विधायक हैं, जिसके दम पर वह आसानी से 2 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। वहीं विपक्षी दल कांग्रेस भी अपने विधायकों की संख्या के बूते 1 सीट आसानी से निकालने की स्थिति में है। इसके चलते राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी राज्यसभा भेजे जाने की सियासी चर्चाएं काफी तेज हैं।
झारखंड का समीकरण: झारखंड की 2 खाली हो रही सीटों पर मुकाबला कड़ा हो सकता है। यहाँ प्रति सीट जीतने के लिए करीब 28 वोटों की जरूरत पड़ेगी। विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन (JMM-कांग्रेस) और एनडीए (NDA) के बीच इन सीटों को लेकर सीधी टक्कर देखने को मिलेगी।
पूर्वोत्तर के राज्य: अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम जैसे पूर्वोत्तर के राज्यों में केवल एक-एक सीट पर चुनाव होना है। इन राज्यों की विधानसभाओं में सत्ताधारी दलों के पास स्पष्ट बहुमत है, जिसके कारण यहाँ चुनाव आमतौर पर सीधे और निर्विरोध जैसे होते हैं, क्योंकि क्रॉस वोटिंग (बगावत) की संभावना बेहद कम है।
इन बड़े दिग्गजों की साख दांव पर
यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि देश की राजनीति के कई बेहद सीनियर और दिग्गज नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है। जिनकी सदस्यता खत्म होने जा रही है या जिनकी सीटें दांव पर हैं, उनमें ये प्रमुख नाम शामिल हैं:
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मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष)
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दिग्विजय सिंह (मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता)
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एच. डी. देवेगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री)
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रवनीत सिंह बिट्टू (केंद्रीय रेल राज्य मंत्री)
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि मतदान के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए सिर्फ रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा दिए गए विशेष 'वायलेट स्केच पेन' का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। किसी अन्य पेन से टिक करने पर वोट अमान्य (रिजेक्ट) घोषित कर दिया जाएगा। पूरी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष ऑब्जर्वर भी नियुक्त किए जा रहे हैं।
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