आज पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे और महंगा;देश में भरपूर है पेट्रोल-डीजल, फिर क्यों बढ़ती जा रहीं कीमतें

देश में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों तथा वैश्विक आपूर्ति संकट के कारण भारत में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी लगातार महंगे हो रहे हैं।

आज पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे और महंगा;देश में भरपूर है पेट्रोल-डीजल, फिर क्यों बढ़ती जा रहीं कीमतें

ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम जनता की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है। शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर, डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर और CNG की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है। पिछले 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 5 रुपये तक बढ़ चुके हैं।

हैरानी की बात यह है कि केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में ईंधन का भरपूर स्टॉक है और सप्लाई पूरी तरह से स्थिर है। ऐसे में आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि "जब देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है, तो फिर कीमतें क्यों बढ़ती जा रही हैं?"

इसके पीछे की असली वजह घरेलू स्टॉक नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियां और अंतरराष्ट्रीय बाजार का गणित है। 

1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) दूसरे देशों से आयात करता है। देश के भीतर भले ही तेल का पर्याप्त स्टॉक हो, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को इसे अंतरराष्ट्रीय दरों पर ही खरीदना पड़ता है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य व कूटनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल महंगा होता है, तो देश में ईंधन की कीमतें बढ़ाना कंपनियों की मजबूरी बन जाता है।

2. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इस इलाके में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल की वजह से सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। इसी आपूर्ति संकट और आशंका के चलते दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में आग लगी हुई है, जिसका सीधा असर भारत के आयात खर्च पर पड़ रहा है।

3. तेल कंपनियों का दैनिक घाटा (Under-Recovery)

जब कच्चे तेल के दाम वैश्विक बाजार में अचानक बढ़ते हैं, तो भारत की सरकारी तेल कंपनियां तुरंत घरेलू कीमतें नहीं बढ़ा पाती हैं। इसकी वजह से उन्हें हर दिन भारी नुकसान उठाना पड़ता है। हाल ही में जब कच्चा तेल $120 प्रति बैरल के पार पहुंचा था, तब भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को हर दिन करोड़ों रुपये का घाटा हो रहा था। लागत और बिक्री मूल्य के बीच के इसी बड़े अंतर को पाटने के लिए तेल कंपनियां अब धीरे-धीरे किस्तों में कीमतें बढ़ाकर अपने घाटे की भरपाई कर रही हैं।

4. प्राकृतिक गैस का आयात और CNG पर असर

पेट्रोल-डीजल की तरह भारत अपनी जरूरत की लगभग आधी नेचुरल गैस (प्राकृतिक गैस) भी आयात करता है। वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर हैं। चूंकि देश के भीतर मिलने वाली घरेलू गैस की सीमित मात्रा बिजली और फर्टिलाइजर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता पर दी जाती है, इसलिए CNG कंपनियों को विदेशी महंगी गैस पर निर्भर रहना पड़ता है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ CNG के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।

आम जनता पर क्या होगा इसका असर?

देश में तेल की कोई किल्लत नहीं है, इसलिए पेट्रोल पंपों पर लाइनें लगाने या घबराने की जरूरत बिल्कुल नहीं है। लेकिन कीमतों में इस लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन यानी माल ढुलाई की लागत पर पड़ेगा। डीजल महंगा होने से मंडियों तक फल, सब्जियां और रोजमर्रा का जरूरी सामान पहुंचाना महंगा हो जाएगा, जिससे आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई एक बार फिर आम आदमी को परेशान कर सकती है।