एक साल में तैयार हुआ नया गंभीरा ब्रिज:; अगस्त के अंत तक लोकार्पण की तैयारी !

दर्दनाक हादसे से तेज विकास तक का सफर: ₹212 करोड़ की लागत से 1 साल में तैयार हुआ नया गंभीरा पुल, जल्द होगा शुरू।

एक साल में तैयार हुआ नया गंभीरा ब्रिज:; अगस्त के अंत तक लोकार्पण की तैयारी !

22 लोगों की मौत के दर्दनाक हादसे के बाद सिर्फ एक साल में तैयार हुआ नया गंभीरा ब्रिज: अगस्त के अंत तक लोकार्पण की तैयारी

गुजरात में वडोदरा और आणंद जिले को जोड़ने वाले बहुचर्चित गंभीरा ब्रिज (महीसागर नदी पर स्थित) का नवनिर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया है। 9 जुलाई 2025 को हुए भीषण हादसे में 22 लोगों की जान जाने के बाद राज्य सरकार ने इसे युद्धस्तर पर पूरा करने का संकल्प लिया था। अब लगभग एक वर्ष के भीतर आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों के साथ नया हाई-लेवल ब्रिज बनकर तैयार हो चुका है। वर्तमान में पुल की लोड टेस्टिंग और सुरक्षा परीक्षण का कार्य जारी है, जिसके बाद अगस्त के अंत तक इसे आम जनता और भारी वाहनों के लिए लोकार्पित किए जाने की पूरी संभावना है।

9 जुलाई 2025 की वो खौफनाक सुबह: जब नदी में समा गई थीं 22 जिंदगियां

महीसागर नदी पर बना लगभग चार दशक पुराना मुजपुर–गंभीरा पुल 9 जुलाई 2025 की सुबह अचानक भरभराकर गिर गया था। पुल का एक स्पैन टूटने से उस समय गुजर रहे ट्रक, वैन, ऑटो-रिक्शा और दोपहिया वाहन सीधे नदी में जा गिरे।

इस भयावह त्रासदी में 22 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस हादसे ने न केवल पूरे गुजरात को झकझोर कर रख दिया, बल्कि वडोदरा और आणंद के बीच की सबसे अहम लाइफलाइन भी टूट गई।

लंबा चक्कर और रोजाना की मुश्किलें: 50 किमी का फेरा

गंभीरा ब्रिज टूटने के बाद पादरा, मुजपुर, बोरसद और आणंद के आसपास के ग्रामीण तथा औद्योगिक क्षेत्रों के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा:

  • दूरी और समय की बर्बादी: दोनों जिलों के बीच आवाजाही करने वाले नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और छात्रों को 35 से 50 किलोमीटर का लंबा डायवर्जन (चक्कर) लगाना पड़ रहा था।

  • आर्थिक बोझ: माल ढुलाई और दैनिक यात्रा में लगने वाले अतिरिक्त ईंधन और समय से स्थानीय उद्योग और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुए।

  • अस्थायी व्यवस्था: स्थिति को देखते हुए अप्रैल 2026 में पुराने पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर केवल दोपहिया वाहनों और पैदल यात्रियों को सीमित आवाजाही की अनुमति दी गई थी, लेकिन भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद था।

रिकॉर्ड 12-13 महीनों में नया निर्माण: ₹212 करोड़ का प्रोजेक्ट

हादसे के बाद गुजरात सरकार और मार्ग एवं मकान विभाग (R&B Department) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पुराने पुल के समानांतर नए टू-लेन हाई-लेवल ब्रिज के निर्माण को मंजूरी दी।

  • परियोजना लागत: इस महत्वाकांक्षी ब्रिज प्रोजेक्ट के लिए लगभग ₹212 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी।

  • तेज रफ्तार से कार्य: 300 से अधिक श्रमिकों और अनुभवी इंजीनियरों की टीम ने दिन-रात काम किया।

  • तय समय से पहले तैयारी: सामान्य तौर पर ऐसे बड़े पुलों के निर्माण में 2 से 3 साल का समय लगता है, लेकिन जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए इसे लगभग एक साल के भीतर तैयार कर लिया गया।

आधुनिक तकनीक और सुरक्षा के कड़े मानक

हादसे से सबक लेते हुए नए गंभीरा ब्रिज के निर्माण में सुरक्षा और टिकाऊपन पर विशेष ध्यान दिया गया है:

  1. इपॉक्सी कोटेड स्टील (Epoxy-Coated Steel): नदी के पानी और नमी से पुल के सरियों में जंग न लगे, इसके लिए इपॉक्सी कोटेड स्टील का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पुल की उम्र और मजबूती काफी बढ़ जाती है।

  2. प्रीकास्ट तकनीक: पुल के निर्माण कार्य को गति देने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक प्रीकास्ट संरचनाओं का उपयोग किया गया।

  3. हेवी लोड टेस्टिंग: पुल चालू करने से पहले उस पर भारी ट्रकों और लोड के जरिए विभिन्न मापदंडों पर तकनीकी व भार-सहन क्षमता की जांच (Load Deflection Test) की जा रही है।

अगस्त के अंत तक लोकार्पण: दोनों जिलों के लिए बड़ी राहत

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा परीक्षणों की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार द्वारा अगस्त के अंतिम सप्ताह तक इस पुल का लोकार्पण किया जा सकता है।

नए पुल के शुरू होने से मिलने वाले लाभ:

  • वडोदरा और आणंद के बीच सीधा संपर्क बहाल होगा, जिससे यात्रा का समय 45 से 60 मिनट तक कम हो जाएगा।

  • पेट्रोकेमिकल कॉरिडोर, पादरा के औद्योगिक क्षेत्र और आणंद के कृषि बाजारों के बीच माल परिवहन सुगम होगा।

  • प्रतिदिन आवागमन करने वाले हजारों कामगारों और स्थानीय नागरिकों को 50 किमी के लंबे चक्कर और अतिरिक्त खर्च से मुक्ति मिलेगी।