लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पास , राज्यसभा में वंदेमातरम से जुड़ा संशोधित बिल पास !
सालों की तपस्या और देर रात तक की पढ़ाई अब जाया नहीं जाएगी। संसद ने पास किया सख्त एंटी-पेपर लीक कानून। पेपर लीक करने वालों और माफियाओं को सीधे जेल और ₹10 करोड़ का जुर्माना भुगतना होगा!
पेपर लीक रोकने के लिए संसद सख्त: नए विधेयक में भारी जुर्माना और जेल का प्रावधान
संसद के मानसून सत्र में देश के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के हित में दो महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। एक ओर जहां लोकसभा में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक माफियाओं पर लगाम कसने के लिए नया लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पेश किया गया, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक को हरी झंडी दे दी गई।
1. एंटी-पेपर लीक बिल: परीक्षा माफियाओं पर कड़ा प्रहार
देशभर में NEET और अन्य भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए विधेयक पारित कराने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस विधेयक में न केवल पेपर लीक करने वाले व्यक्तियों बल्कि संगठित गिरोहों, परीक्षा केंद्रों और सेवा प्रदाता कंपनियों पर भी भारी नकेल कसी गई है।
नए कानून के मुख्य प्रावधान
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कड़ी सजा व जुर्माना:
संगठित पेपर लीक और परीक्षा में धांधली में शामिल पाए जाने पर दोषियों को 7 से 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। -
फास्ट-ट्रैक कोर्ट और समय सीमा:
पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच अधिकतम 2 महीने में पूरी की जाएगी और विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों (Fast-Track Courts) के जरिए 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाएगा। -
एजेंसियों पर नकेल:
गड़बड़ी में शामिल दोषी सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को 8 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उनके निदेशकों/प्रबंधकों के खिलाफ व्यक्तिगत आपराधिक मामला दर्ज होगा। -
कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई:
यदि किसी कोचिंग सेंटर या निजी संस्था की मिलीभगत पाई जाती है, तो उनकी संपत्ति जब्त करने का भी नियम बनाया गया है।
2. राज्यसभा में 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन बिल' पास
संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में गृह राज्य मंत्री द्वारा राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक पेश किया गया, जिसे सदन की मंजूरी मिल गई है।
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वंदे मातरम् से जुड़ा प्रावधान:
इस संशोधित विधेयक के तहत राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के अपमान या इसके गायन में जानबूझकर बाधा उत्पन्न करने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। -
इसका उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान बनाए रखना तथा किसी भी प्रकार की अवमानना पर कानूनी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त करना है।
इन विधायी सुधारों से एक तरफ जहां लाखों परीक्षार्थियों और युवाओं को निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली का भरोसा मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े कानूनों को भी अधिक स्पष्टता दी गई है।
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