PM मोदी का वीडियो हटाने पर Meta फंसा !

PM मोदी का वीडियो डिलीट करना फेसबुक को पड़ेगा भारी? अगर जुकरबर्ग ने माफी नहीं मांगी, तो अधिकारियों पर दर्ज हो सकती है सीधी FIR! जानिए क्या है पूरा मामला और क्या होता है 'सेफ हार्बर' क्लॉज।

PM मोदी का वीडियो हटाने पर Meta फंसा !

माफी मांगें या कार्रवाई के लिए तैयार रहें... PM का वीडियो हटाने को लेकर मार्क जुकरबर्ग को 3 दिन का अल्टीमेटम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) को व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने के लिए 3 दिन का अल्टीमेटम दिया है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते हैं, तो कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में पीएम मोदी द्वारा पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा करते हुए युवाओं को संबोधित करने वाला एक वीडियो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था। मेटा ने इस वीडियो को प्लेटफॉर्म से हटा दिया था और यह वीडियो रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक (करीब 5 घंटे) प्लेटफॉर्म से गायब रहा। इस घटना को लेकर सरकार ने मेटा के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया था। सोमवार को हुई तीन घंटे से अधिक की बैठक के बाद यह अल्टीमेटम जारी किया गया है।

समिति की सख्त चेतावनी: 'सेफ हार्बर' छिनने का खतरा

सांसद निशिकांत दुबे ने स्पष्ट किया है कि 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि प्रधानमंत्री का वीडियो डिलीट करना लोकतंत्र पर हमले जैसा है। समिति ने चेतावनी दी है कि अगर जुकरबर्ग व्यक्तिगत तौर पर माफी नहीं मांगते हैं, तो सरकार सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 79 के तहत मेटा को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) सुरक्षा वापस लेने पर विचार कर सकती है।

क्या होता है 'सेफ हार्बर' क्लॉज?

इस प्रावधान के तहत सोशल मीडिया नेटवर्क और इंटरनेट सेवा प्रदाता अपने प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स (थर्ड पार्टी) द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं होते हैं। अगर यह सुरक्षा हट जाती है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अधिकारियों के खिलाफ सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकेगी और उन्हें आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है।

मेटा की सफाई और समिति का जवाब

मेटा के प्रतिनिधियों ने संसदीय समिति के समक्ष इस घटना पर खेद जताया और इसे एक "तकनीकी खराबी" (Technical Glitch) करार दिया। कंपनी ने कहा कि सामग्री गलती से हटाई गई थी और उसे बाद में प्लेटफॉर्म पर फिर से बहाल कर दिया गया।

हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और संसदीय समिति ने इस स्पष्टीकरण को "अपर्याप्त" माना है। समिति के सदस्यों ने कहा कि यह मामला सिर्फ माफी मांगने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जवाबदेही तय होनी चाहिए।

समिति की अन्य प्रमुख आपत्तियां:

  • लिखित जवाब की मांग: समिति ने मेटा से 10 दिनों के भीतर लिखित रूप में विस्तृत जवाब मांगा है कि आखिर यह वीडियो किस आधार पर हटाया गया।

  • एल्गोरिदम पर सवाल: बैठक में सांसदों ने मेटा के एल्गोरिदम पर चिंता जताते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने को किसने अधिकृत किया था और इसमें किसकी जिम्मेदारी बनती है।

  • कंटेंट का भेदभाव: सदस्यों ने आरोप लगाया कि एल्गोरिदम में बायस (bias) है, जिसके तहत प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री मौजूद रहती है जबकि वास्तविक (genuine) कंटेंट को हटा दिया जाता है।