₹1.81 लाख करोड़ के निवेश के साथ गिफ्ट सिटी बनी भारत का नया ग्लोबल गेटवे !

भारत का पहला इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विस सेंटर (GIFT City) अब सिंगापुर को दे रहा है कड़ी टक्कर। जानिए इस ऐतिहासिक निवेश के प्रमुख आंकड़े और भारत पर इसका असर।

₹1.81 लाख करोड़ के निवेश के साथ गिफ्ट सिटी बनी भारत का नया ग्लोबल गेटवे !

1.81 लाख करोड़ का निवेश, गिफ्ट सिटी का धमाका: भारत का नया गेटवे सिंगापुर को टक्कर देने को तैयार

गुजरात के गांधीनगर में साबरमती नदी के तट पर विकसित हो रही गिफ्ट सिटी (Gujarat International Finance Tec-City) अब केवल एक स्मार्ट सिटी का सपना नहीं, बल्कि वैश्विक वित्त जगत का एक शक्तिशाली केंद्र बन चुकी है। हालिया आंकड़ों और वित्तीय प्रवाह के अनुसार, गिफ्ट सिटी में ₹1.81 लाख करोड़ का प्रत्यक्ष निवेश दर्ज किया गया है, जबकि दुनिया भर के 70 से अधिक देशों के निवेशकों और वित्तीय संस्थानों ने ₹3.17 लाख करोड़ से अधिक की प्रतिबद्धता (Commitment) जताई है।

यह अभूतपूर्व वृद्धि स्पष्ट संकेत देती है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह के लिए सिंगापुर, दुबई (DIFC) और मॉरीशस जैसे स्थापित वित्तीय केंद्रों को सीधी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

गिफ्ट सिटी: भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC)

गिफ्ट सिटी को भारत के पहले बहु-सेवा विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (GIFT IFSC) के रूप में तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य उस अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कारोबार को भारत की सीमा के भीतर लाना है, जो पहले सिंगापुर, लंदन या दुबई जैसे विदेशी ऑफशोर केंद्रों के जरिए संचालित होता था।

  • एकीकृत नियामक (IFSCA): यहां बैंकिंग, पूंजी बाजार और बीमा क्षेत्र के लिए अलग-अलग नियमों के बजाय IFSCA (International Financial Services Centres Authority) एक सिंगल-विंडो रेगुलेटर के रूप में कार्य करता है।

  • ग्लोबल ऑफशोर टेरिटरी का दर्जा: भारत में स्थित होने के बावजूद IFSC जोन को विदेशी मुद्रा लेनदेन और कराधान के संदर्भ में ऑफशोर जूरिडिक्शन माना जाता है।

सिंगापुर और दुबई को सीधी चुनौती: गिफ्ट सिटी के मुख्य आकर्षण

गिफ्ट सिटी वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई रणनीतिक और वित्तीय लाभ प्रदान करती है:

1. 100% टैक्स हॉलिडे और टैक्स छूट

गिफ्ट IFSC में स्थापित कंपनियों को 15 वर्षों के ब्लॉक में से 10 वर्षों के लिए 100% कॉर्पोरेट टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा:

  • विदेशी निवेशकों के लिए गैर-घरेलू प्रतिभूतियों के लेन-देन पर कैपिटल गेन्स टैक्स में पूर्ण छूट दी गई है।

  • न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) की दर को घटाकर सिर्फ 9% रखा गया है।

  • इनपुट और आउटपुट सेवाओं पर GST की छूट उपलब्ध है।

2. इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX)

भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय बुलियन एक्सचेंज की स्थापना गिफ्ट सिटी में की गई है, जिससे भारत केवल सोने का उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मूल्य निर्धारक (Price Setter) बनने की राह पर है।

3. डॉलर-डिनॉमिनेटेड ट्रेडिंग और NSE IX-SGX कनेक्ट

सिंगापुर एक्सचेंज (SGX) और निफ्टी के ऐतिहासिक तालमेल के बाद अब डॉलर आधारित निफ्टी कॉन्ट्रैक्ट्स का व्यापार सीधे गिफ्ट सिटी से संचालित होता है, जिससे विदेशी पूंजी का सीधा प्रवाह भारत में सुनिश्चित हुआ है।

4. फैमिली ऑफिस और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs)

वैश्विक स्तर पर अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ (UHNWI) परिवारों और फंड प्रबंधकों के लिए गिफ्ट सिटी अब एक पसंदीदा हब बन रहा है। कम परिचालन लागत और लचीले विदेशी मुद्रा नियमों के चलते यहां 100 से अधिक AIFs और फैमिली इन्वेस्टमेंट फंड्स पंजीकृत हो चुके हैं।

विश्वस्तरीय स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर

गिफ्ट सिटी का शहरी नियोजन भारत के पारंपरिक शहरों से बिल्कुल अलग और भविष्योन्मुखी है:

  • यूटिलिटी टनल (Utility Tunnel): शहर में जमीन खोदने की आवश्यकता नहीं होती; सभी बिजली, पानी और इंटरनेट केबल एक विशाल भूमिगत टनल नेटवर्क से संचालित हैं।

  • डिस्ट्रिक्ट कूलिंग सिस्टम (DCS): व्यक्तिगत एयर कंडीशनर के स्थान पर केंद्रीकृत शीतलन प्रणाली है, जिससे ऊर्जा की खपत 30% तक कम होती है।

  • ऑटोमेटेड वेस्ट कलेक्शन (AWCS): कचरे के निपटान के लिए भूमिगत वैक्यूम पाइपलाइन प्रणाली लगाई गई है, जिससे सतह पर कचरा गाड़ियां नहीं दिखतीं।

  • मजबूत कनेक्टिविटी: मेट्रो रेल नेटवर्क, 8-लेन एक्सप्रेसवे और सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से निकटता इसे व्यापार और आवागमन दोनों के लिए सुगम बनाती है।

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं?

गिफ्ट सिटी में ₹1.81 लाख करोड़ का निवेश और 70 से अधिक देशों का भरोसा भारत को $5 ट्रिलियन और आगे चलकर $10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में रीढ़ की हड्डी साबित हो रहा है।

वैश्विक वित्तीय मध्यस्थता (Financial Intermediation) पर भारतीय नियंत्रण बढ़ने से देश में उच्च-मूल्य वाली नौकरियों का सृजन हो रहा है, विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिल रही है और भारत अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार का प्रमुख प्रवेश द्वार बन चुका है।