भारत को बड़ा झटका; चाबहार पोर्ट तबाह ?
अमेरिका के लगातार छठे रात हुए हवाई हमलों में ईरान स्थित भारत के रणनीतिक चाबहार पोर्ट का कंट्रोल टावर तबाह हो गया है। इस हमले से भारत का करीब ₹1,000 करोड़ का निवेश और मध्य एशिया तक पहुँचने का मुख्य व्यापारिक रास्ता बड़े खतरे में पड़ गया है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक सिरदर्द बन चुका है।
अमेरिकी हमलों में चाबहार बंदरगाह के एक प्रमुख कंट्रोल टावर (मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर) को निशाना बनाया गया है, जो पूरी तरह जमींदोज हो गया है।
चाबहार पोर्ट पर क्या हुआ?
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कंट्रोल टावर तबाह:
अमेरिकी हमलों में ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार पोर्ट का सर्विलांस और मैरीटाइम कंट्रोल टावर धराशायी हो गया। अमेरिकी रक्षा सचिव (Defence Secretary) पीट हेगसेथ ने खुद इस टावर के गिरने की तस्वीरें साझा की हैं। -
टर्मिनल्स को नुकसान:
हमलों के कारण चाबहार के शहीद बेहिश्ती और कलंतरी टर्मिनलों के पास बुनियादी ढांचे और दो मरीन पियर्स (डॉकिंग सुविधाओं) को भारी नुकसान पहुंचा है। -
ब्लैकआउट:
भारी बमबारी की वजह से पोर्ट और उसके आस-पास के कई इलाकों की बिजली पूरी तरह गुल हो गई है। -
अमेरिका का तर्क:
ईरान का कहना है कि यह टावर केवल कमर्शियल (व्यापारिक) जहाजों की निगरानी करता था, जबकि अमेरिका का मानना है कि इस पोर्ट का इस्तेमाल ईरान की पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) भी अपनी रणनीतिक गतिविधियों के लिए करती है।
भारत के लिए यह क्यों बड़ा झटका है?
चाबहार पोर्ट केवल ईरान का बंदरगाह नहीं है, बल्कि यह मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचने के लिए भारत का सबसे बड़ा रणनीतिक रास्ता है।
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₹1000 करोड़ का निवेश दांव पर:
भारत ने इस महत्वपूर्ण पोर्ट को विकसित करने के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये ($120 मिलियन) का भारी-भरकम निवेश किया है। मई 2024 में ही भारत ने इसके 'शहीद बेहिश्ती टर्मिनल' को 10 साल तक संचालित करने के लिए एक लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट साइन किया था। -
पाकिस्तान को बाइपास करने का रास्ता ब्लॉक:
भारत, पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान और रूस तक सीधे व्यापार के लिए इसी चाबहार पोर्ट का इस्तेमाल कर रहा था (यह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर - INSTC का हिस्सा है)। इस हमले के बाद भारत का यह पूरा ट्रेड रूट खतरे में आ गया है। -
चीन के 'ग्वादर पोर्ट' को जवाब:
पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित किए जा रहे ग्वादर पोर्ट को टक्कर देने के लिए भारत चाबहार को मजबूत कर रहा था। चाबहार पर अमेरिकी हमलों से चीन के खिलाफ भारत की यह रणनीतिक बढ़त कमजोर पड़ सकती है।
पहले ही हाथ खींच चुका था भारत?
भू-राजनीतिक (Geopolitical) जानकारों के मुताबिक, अमेरिका के भारी दबाव के कारण भारत ने पहले ही चाबहार में अपनी सीधी सक्रियता कम कर दी थी।
लेकिन अब, अमेरिका की इस सीधी बमबारी ने भारत की बची-खुची भविष्य की रणनीतिक उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।
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