भारत पर मंडराया 'अल नीनो' का खतरा !

प्रशांत महासागर की गहराई में चल रही हलचल ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। नासा के Sentinel-6 उपग्रह ने पाया है कि समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी ऊपर जा चुका है।

भारत पर मंडराया 'अल नीनो' का खतरा !

प्रशांत महासागर में खतरनाक अल नीनो एक्टिव, भारत पर मंडराया बड़ा खतरा

दुनियाभर में मौसम का मिजाज बदलने वाला है और इस बार चेतावनी किसी छोटे संगठन ने नहीं, बल्कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA और वैश्विक मौसम वैज्ञानिकों ने दी है। प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में विनाशकारी 'अल नीनो' (El Niño) पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, और इसके तेजी से मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति साल 2027 तक खिंच सकती है, जो भारत सहित पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है।

क्या है नासा का दावा? (NASA Satellite Insights)

नासा के सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच (Sentinel-6 Michael Freilich) उपग्रह से मिले ताजा आंकड़ों के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान और जल स्तर सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार: प्रशांत महासागर के नीचे 'केल्विन तरंगें' (Kelvin Waves) सक्रिय हैं, जो गर्म पानी को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं। इसके कारण समुद्र की सतह का तापमान वैश्विक थ्रेसहोल्ड (+0.80°C) को पार कर +0.92°C तक पहुंच चुका है और साल के अंत तक इसके 3°C से भी ऊपर जाने की आशंका है। अगर ऐसा हुआ, तो यह इतिहास के सबसे खतरनाक 'सुपर अल नीनो' में से एक होगा।

भारत पर क्यों मंडराया बड़ा खतरा? (Impact on India)

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्रों (जैसे APCC) ने स्पष्ट किया है कि प्रशांत महासागर में होने वाली इस हलचल का सीधा और सबसे घातक असर भारतीय मानसून (Southwest Monsoon) पर पड़ेगा।

भारत के लिए मुख्य चिंताएं निम्नलिखित हैं:

  • कमजोर मानसून और सूखे का डर: अल नीनो के एक्टिव होने से भारत में मानसून की हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। जून से सितंबर के दौरान देश के कई हिस्सों, विशेषकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से बहुत कम बारिश होने की आशंका है।

  • भीषण गर्मी और हीटवेव (Heatwaves): अल नीनो के कारण देश के अधिकांश राज्यों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा, जिससे आने वाले महीनों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और लू का सामना करना पड़ सकता है।

  • खेती और अर्थव्यवस्था पर चोट: भारत की कृषि काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। बारिश की कमी से फसलों के उत्पादन में गिरावट आ सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा (Food Security) प्रभावित होगी और महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है।

  • जल संकट (Water Scarcity): जलाशयों और नदियों में पानी का स्तर घटने से पीने के पानी और सिंचाई के लिए संकट खड़ा हो सकता है।

'अल नीनो' क्या है और यह कैसे काम करता है?

सरल शब्दों में कहें तो 'अल नीनो' एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है, जो प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण पैदा होता है। इसके सक्रिय होने से हवाओं का रुख बदल जाता है, जिससे दुनिया के कुछ हिस्सों में भारी बाढ़ आती है (जैसे अमेरिका और दक्षिण अमेरिका), जबकि भारत, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के अन्य हिस्सों में भयंकर सूखा पड़ता है।

सरकार और प्रशासन के लिए अलार्म बेल

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समय देश के लिए 'अलर्ट मोड' पर आने का है। कृषि क्षेत्र को बचाने के लिए अभी से आकस्मिक योजनाएं (Crop Advisories) और बेहतर जल प्रबंधन (Water Management Plans) की रणनीतियों पर काम शुरू करना होगा ताकि अल नीनो के इस बड़े खतरे के प्रभाव को कम किया जा सके।