पाक-चीन को लगा 440 वोल्ट का झटका; भारत ने पहली बार तैनात किए 'रेडी-टू-यूज़' परमाणु हथियार !
इतिहास में पहली बार! 12 परमाणु हथियार 'ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट' पर, भारत की सैन्य शक्ति का नया दौर।
भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार किए तैनात! नई रिपोर्ट से पाक-चीन को लगेगा 440 वोल्ट का झटका
वैश्विक परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली प्रतिष्ठित संस्था सिपरी (SIPRI - Stockholm International Peace Research Institute) की ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया, खासकर पाकिस्तान और चीन के रक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अपने परमाणु इतिहास में पहली बार एक बड़ा और आक्रामक रणनीतिक बदलाव किया है। भारत ने अपने परमाणु बेड़े से 12 परमाणु हथियारों (Nuclear Warheads) को 'ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट' यानी तुरंत हमले के लिए तैनात कर दिया है।
अब तक अपनी "नो फर्स्ट यूज" (पहले परमाणु हमला न करने) की नीति के तहत भारत अपने परमाणु हथियारों को मिसाइलों या लॉन्चरों से अलग रखता था। लेकिन इस नए कदम ने बीजिंग और इस्लामाबाद के सैन्य रणनीतिकारों को 440 वोल्ट का करारा झटका दिया है। आइए समझते हैं कि सिपरी की रिपोर्ट में क्या है और भारत के इस कदम के मायने क्या हैं।
क्या कहती है सिपरी (SIPRI) की नई रिपोर्ट?
सिपरी की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण की होड़ तेज हो गई है। लेकिन सबसे चौंकाने वाला दावा भारत को लेकर है:
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परमाणु हथियारों की कुल संख्या: भारत के पास परमाणु हथियारों की संख्या बढ़कर अब लगभग 172 हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है। (दिलचस्प बात यह है कि भारत इस मामले में अब पाकिस्तान से आगे निकल चुका है)।
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पहली बार कमान और नियंत्रण में बदलाव: रिपोर्ट का दावा है कि भारत ने अपने 12 परमाणु हथियारों को 'लॉन्च-ऑन-वार्निंग' या 'रेडी-टू-यूज़' मोड में रखा है। इसका मतलब है कि आपातकाल में इन हथियारों को दागने में चंद मिनटों का समय लगेगा।
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परमाणु त्रिशूल (Nuclear Triad) हुआ मजबूत: भारत की परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत (INS Arihant) और हाल ही में शामिल हुई आईएनएस अरिघात (INS Arighat) पर लगी मिसाइलों को अब पूरी तरह मुस्तैद कर दिया गया है।
पाकिस्तान और चीन के उड़े होश: क्यों लगा 440 वोल्ट का झटका?
भारत के इस कदम ने दोनों पड़ोसी दुश्मनों की नींद उड़ा दी है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
1. चीन के 'न्यूक्लियर ब्लैकमेल' का अंत
चीन लगातार अपनी परमाणु क्षमता बढ़ा रहा है और उसने भारत की सीमा (LAC) के करीब साइलो (मिसाइल दागने वाले भूमिगत ठिकाने) बनाए हैं। भारत ने अपनी अग्नि-5 (Agni-V) मिसाइल में MIRV तकनीक (एक मिसाइल से कई परमाणु हमले करने की क्षमता) का सफल परीक्षण करके पहले ही चीन को चौंकाया था। अब, 12 परमाणु हथियारों की सीधी तैनाती से चीन को साफ संदेश मिल गया है कि भारत उसकी किसी भी हिमाकत का जवाब पलक झपकते ही दे सकता है।
2. पाकिस्तान का 'परमाणु हौवा' हुआ बेअसर
पाकिस्तान अक्सर भारत को डराने के लिए अपने 'टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स' (छोटे परमाणु हथियारों) की धमकी देता रहता था। भारत के इस जवाबी और आक्रामक रुख ने पाकिस्तान की इस रणनीति को पूरी तरह फेल कर दिया है। अब पाकिस्तान को पता है कि अगर उसने कोई दुस्साहस किया, तो भारत के रेडी-टू-यूज़ परमाणु हथियार उसका नामोनिशान मिटा देंगे।
3. 'सेकंड स्ट्राइक' क्षमता का प्रदर्शन
भारत की नीति है कि वह पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। लेकिन इसका मतलब यह भी है कि अगर कोई देश भारत पर हमला करता है, तो भारत का पलटवार इतना भयानक होगा कि सामने वाला देश संभल नहीं पाएगा। समुद्र के भीतर तैनात परमाणु पनडुब्बियों पर इन 12 हथियारों की मौजूदगी भारत की इसी 'सेकंड स्ट्राइक' (पलटवार) की क्षमता को अचूक बनाती है।
शांतिपूर्ण नीति से 'कड़े रुख' की ओर बढ़ता भारत
इस रिपोर्ट से यह साफ है कि भारत अब रक्षात्मक मुद्रा से बाहर निकलकर 'आक्रामक रक्षा' (Aggressive Defense) की नीति अपना रहा है। यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच भारत ने यह समझ लिया है कि अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य ताकत को हर वक्त युद्ध के लिए तैयार रखना बेहद जरूरी है।
हालांकि, भारत सरकार ने हमेशा वैश्विक शांति का समर्थन किया है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में कोई समझौता न करने की नीति ने आज भारत को दुनिया की एक ऐसी महाशक्ति बना दिया है, जिससे टकराने की भूल अब चीन और पाकिस्तान कभी नहीं करना चाहेंगे।
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