पानी के लिए तरसा पाकिस्तान; UNSC में मांगी मदद !
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने UNSC में गुहार लगाई है, क्योंकि उसे भारत की नई पनबिजली परियोजनाओं से पानी रुकने का डर सता रहा है।
सिंधु के पानी के लिए तड़प रहा पाकिस्तान! UNSC में गिड़गिड़ाया, भारत से संधि बहाल करने की मांग
आजकल पाकिस्तान एक तरफ अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ उसे अपनी 'जीवनरेखा' यानी सिंधु नदी (Indus River) के पानी के सूखने का डर सता रहा है। हाल ही में पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया है, जो यह दर्शाता है कि पड़ोसी मुल्क इस समय पानी की भारी किल्लत और भारत के कड़े रुख से कितना घबराया हुआ है।
पाकिस्तान की बेचैनी का मुख्य कारण
पाकिस्तान की कृषि और बिजली व्यवस्था पूरी तरह से उन नदियों पर टिकी है जो भारत से होकर गुजरती हैं। भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में बनाई जा रही जलविद्युत परियोजनाओं (जैसे किशनगंगा और रतले पनबिजली परियोजना) ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। पाकिस्तान का आरोप है कि भारत इन परियोजनाओं के जरिए संधि का उल्लंघन कर रहा है और उसके हिस्से का पानी रोक सकता है।
UNSC में क्या हुआ?
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गुहार लगाई है कि सिंधु जल संधि को उसी के पुराने स्वरूप में बहाल रखा जाए। पाकिस्तान को डर है कि भारत संधि की समीक्षा कर सकता है या इसमें बड़े बदलाव कर सकता है। दरअसल, भारत ने पहले ही पाकिस्तान को संधि में संशोधन (Modification) के लिए नोटिस जारी किया है, जिससे पाकिस्तान अलग-थलग महसूस कर रहा है।
क्या है सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty)?
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई यह संधि दुनिया की सबसे सफल जल संधियों में से एक मानी जाती है। इसके तहत नदियों का बँटवारा कुछ इस प्रकार है:
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पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलज): इन पर भारत का पूर्ण अधिकार है।
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पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब): इन नदियों का अधिकार पाकिस्तान को मिला है, लेकिन भारत को इन पर सीमित सिंचाई और बिजली परियोजनाएं (Run-of-the-river) बनाने का अधिकार है।
भारत का कड़ा रुख और पाकिस्तान की मांग
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के 'आतंकवाद' और 'अड़ियल रवैये' के बीच बातचीत और सहयोग का पुराना तरीका अब नहीं चलेगा। भारत का कहना है कि पाकिस्तान बार-बार अंतरराष्ट्रीय तटस्थ विशेषज्ञों के पास जाकर संधि की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है।
पाकिस्तान अब भारत से 'संधि बहाल' करने की मांग कर रहा है ताकि उसकी पानी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उसे डर है कि यदि भारत ने 'पानी की कूटनीति' (Water Diplomacy) का इस्तेमाल किया, तो पाकिस्तान का एक बड़ा हिस्सा बंजर हो सकता है।
पाकिस्तान की UNSC में यह 'गिड़गिड़ाहट' उसकी मजबूरी को दिखाती है। जहाँ एक तरफ वह भारत विरोधी गतिविधियों से बाज नहीं आता, वहीं दूसरी तरफ वह उसी भारत से संधि की दुहाई दे रहा है। अब गेंद भारत के पाले में है कि वह इस 60 साल पुरानी संधि को किस दिशा में लेकर जाता है।
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