आज से गुजरात में डिजिटल 'वस्ती गणना 2027' का प्रारंभ !

आज से गुजरात भर में वस्ती गणना 2027 (Census) की शुरुआत हो चुकी है। यह आज़ादी के बाद की 8वीं जनगणना है जो पूरी तरह मोबाइल ऐप के ज़रिए होगी।

आज से गुजरात में डिजिटल 'वस्ती गणना 2027' का प्रारंभ !

डिजिटल क्रांति के साथ भारत की 16वीं जनगणना का शंखनाद: गुजरात में जनगणना का हुआ आगाज़

भारत के सांख्यिकीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। गुजरात सहित पूरे देश में वस्ती गणना 2027 (जनगणना) के पहले चरण की आधिकारिक शुरुआत आज (1 जून) से हो गई है। यह राष्ट्रीय महाअभियान कई मायनों में ऐतिहासिक है क्योंकि देश के इतिहास में पहली बार कागज़-कलम को छोड़कर सिटिज़न्स और एन्युमरेटर्स (प्रगणक) पूरी तरह से डिजिटल माध्यम का उपयोग कर रहे हैं।

यह देश की 16वीं और आज़ादी के बाद की 8वीं जनगणना है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हाल ही में स्वयं का डिजिटल पंजीकरण (Self-Enumeration) कर राज्य में इस अभियान की भूमिका तैयार की थी।

1. दो चरणों में पूरा होगा यह महा-अभियान

इस पूरी जनगणना को प्रशासनिक स्तर पर सुचारू रूप से चलाने के लिए दो अलग-अलग समय सीमाओं (चरणों) में विभाजित किया गया है:

प्रथम चरण: मकानों की सूची और विवरण (1 से 30 जून)

आज से शुरू हुआ पहला चरण पूरे जून महीने (30 जून तक) चलेगा। इसमें मुख्य रूप से 'हाउस लिस्टिंग' (घर और मका‍नों की गणना) की जाएगी। इस दौरान सरकारी तौर पर तैनात किए गए प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर बुनियादी ढांचे और सुविधाओं से जुड़े आंकड़े जुटाएंगे।

द्वितीय चरण: जनसंख्या एवं जाति गणना (फरवरी 2027)

इस अभियान का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी, 2027 के बीच आयोजित किया जाएगा। इस चरण में देश की वास्तविक जनसंख्या की गिनती के साथ-साथ जातिगत जनगणना (Caste Census) को भी शामिल किया गया है, जो नीति-निर्धारण के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण आंकड़े प्रदान करेगी।

2. पहले चरण में पूछे जाएंगे कुल 33 सवाल

इस एक महीने लंबे चलने वाले 'हाउस लिस्टिंग' अभियान में प्रगणकों द्वारा हर परिवार से कुल 33 प्रश्न पूछे जा रहे हैं। ये प्रश्न मुख्य रूप से निम्नलिखित बुनियादी सुविधाओं और संपत्तियों पर केंद्रित हैं:

  • मकान की स्थिति: मकान कच्चा है या पक्का, कमरों की संख्या कितनी है।

  • पारिवारिक विवरण: परिवार में मुख्य सदस्यों की संख्या और उनकी सामान्य जानकारी।

  • बुनियादी सुविधाएं: पीने के पानी का मुख्य स्रोत, बिजली की उपलब्धता और शौचालय की सुविधा।

  • घरेलू संपत्तियां: परिवार के पास टीवी, इंटरनेट, वाहन (दोपहिया/चार पहिया) या अन्य आवश्यक संपत्तियां हैं या नहीं।

3. गुजरात में 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) को मिला बंपर रिस्पॉन्स

डिजिटल इंडिया की झलक इस बार जनगणना में साफ देखने को मिल रही है। सरकार ने नागरिकों को घर बैठे खुद की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने के लिए 17 मई से 31 मई तक 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' (स्व-गणना) का विकल्प दिया था।

रिकॉर्ड भागीदारी: गुजरात में 3.74 लाख से अधिक नागरिकों ने इस डिजिटल पोर्टल पर जाकर अपनी और अपने परिवार की जानकारी खुद दर्ज की है। इनमें से लगभग 3.30 लाख से ज्यादा फॉर्म पूरी तरह सबमिट भी हो चुके हैं।

जिन लोगों ने खुद को ऑनलाइन रजिस्टर कर लिया है, उन्हें एक यूनिक SE ID (सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी) मिला है। जब प्रगणक उनके घर आएंगे, तो वे सिर्फ इस आईडी को वेरिफाई करेंगे और उनका समय बच जाएगा।

4. आधुनिक तकनीक: ऐप आधारित और 16 भाषाओं में काम

इस डिजिटल जनगणना के लिए केंद्र सरकार ने HLO (Houselisting and Housing Census Operations) मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया है, जो एंड्रॉइड (Android) और आईओएस (iOS) दोनों पर काम करता है।

  • यह ऐप गुजराती सहित 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।

  • इसमें ऑफलाइन डेटा कलेक्शन की भी सुविधा है, ताकि इंटरनेट न होने पर भी ग्रामीण इलाकों में काम न रुके। जैसे ही प्रगणक नेटवर्क क्षेत्र में आएंगे, डेटा सीधे मुख्य सर्वर पर अपलोड हो जाएगा।

  • अकेले गुजरात में इस काम को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए 1 लाख से अधिक प्रगणकों और 18 हजार से ज्यादा सुपरवाइज़रों को तीन चरणों की कड़ी ट्रेनिंग देकर मैदान में उतारा गया है।

गोपनीयता की गारंटी: जनगणना महानिदेशालय के अनुसार, जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत नागरिकों द्वारा दी गई सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित रखी जाएंगी। इस डेटा का उपयोग किसी भी प्रकार की टैक्स वसूली, कानूनी कार्रवाई या अदालती साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकता है। सरकार ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे बिना किसी डर के प्रगणकों को बिल्कुल सटीक और सही जानकारी दें।