सावधान! क्या आपके पास भी जेब में रखने के लिए कैश नहीं है ?

डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब एटीएम (ATM) सेवाएं बड़े संकट से गुजर रही हैं। देश भर में हजारों एटीएम बंद हो चुके हैं और आने वाले दिनों में आपको कैश के लिए भटकना पड़ सकता है!

सावधान! क्या आपके पास भी जेब में रखने के लिए कैश नहीं है ?

जितना चाहेंगे उतना नहीं मिलेगा! लड़खड़ा सकती हैं देश की ATM सर्विसेज, कैश के लिए हो सकते हैं परेशान

डिजिटल इंडिया और UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के दौर में अगर आप अभी भी जेब में कैश रखना पसंद करते हैं या इमरजेंसी के लिए पूरी तरह एटीएम (ATM) पर निर्भर हैं, तो यह खबर आपको परेशान कर सकती है। आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में एटीएम सेवाएं लड़खड़ा सकती हैं, जिससे आम जनता को कैश (नकदी) के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

हालिया रिपोर्ट्स और बैंकिंग सेक्टर से आ रही खबरें इशारा कर रही हैं कि देश के हजारों एटीएम पर ताला लग चुका है या वे कैश की कमी से जूझ रहे हैं। आइए समझते हैं कि इस संभावित कैश संकट के पीछे की असली वजह क्या है।

1. कर्ज के संकट में डूबीं ATM ऑपरेट करने वाली कंपनियां

देश में बैंक खुद सीधे सारे एटीएम का संचालन नहीं करते, बल्कि इसके लिए थर्ड-पार्टी कंपनियों (ATM Operators) को कॉन्ट्रैक्ट दिया जाता है। इस समय देश की सबसे बड़ी एटीएम सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों में से एक भारी कर्ज के संकट से जूझ रही है। खबरों के मुताबिक, करीब 700 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज पर डिफॉल्ट होने की वजह से एटीएम नेटवर्क को मेंटेन करने और उनमें कैश रीफिल (दोबारा पैसा डालने) की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी वित्तीय संकट के चलते अब तक देश भर में हजारों एटीएम ठप हो चुके हैं।

2. UPI के राज में ATM बिजनेस का घटता प्रॉफिट मार्जिन

जब आप अपने बैंक के अलावा किसी दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालते हैं, तो आपका बैंक उस एटीएम ऑपरेटर को एक 'इंटरचेंज फीस' (Interchange Fee) देता है। भारत में यह फीस फिलहाल प्रति कैश विड्रॉल ₹17 और नॉन-कैश ट्रांजैक्शन के लिए ₹6 है।

लेकिन जब से देश में डिजिटल क्रांति और UPI का बोलबाला हुआ है, लोगों ने एटीएम से छोटे-मोटे कैश निकालना बेहद कम कर दिया है। प्रति एटीएम ट्रांजैक्शंस की संख्या लगातार घटने से इन ऑपरेटरों की कमाई कम हो गई है, जबकि एटीएम का किराया, बिजली का बिल और सिक्योरिटी गार्ड जैसे मेंटेनेंस खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। कम मुनाफे के कारण कंपनियां घाटे वाले इलाकों से एटीएम हटा रही हैं।

3. बदल गए हैं ATM से कैश निकालने के नियम

हाल ही में (1 अप्रैल से) देश के कई बड़े बैंकों (जैसे HDFC बैंक और अन्य) ने अपने एटीएम नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक:

  • UPI-ATM विड्रॉल भी लिमिट में शामिल: यदि आप एटीएम पर जाकर बिना कार्ड के केवल QR कोड स्कैन (UPI) करके कैश निकालते हैं, तो उसे भी बैंक आपकी मंथली फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में ही गिनेगा।

  • अतिरिक्त चार्ज का बोझ: फ्री लिमिट (आमतौर पर अपने बैंक में 5 और दूसरे बैंक में 3 या 5) खत्म होने के बाद यदि आप कैश निकालते हैं, तो आपको प्रति ट्रांजैक्शन ₹20 से ₹21 तक का अतिरिक्त चार्ज देना होगा।

आरबीआई (RBI) के आंकड़े क्या कहते हैं? भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, देश में सक्रिय एटीएम की संख्या में लगातार गिरावट देखी जा रही है। जहां पहले एटीएम की संख्या करीब 2,19,000 के पार थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 2,15,000 के आसपास रह गई है। यानी करीब 4,000 से ज्यादा एटीएम पूरी तरह बंद हो चुके हैं और यह सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है।

क्या वाकई देश में कैश खत्म हो रहा है?

दिलचस्प बात यह है कि देश की इकोनॉमी में 'कैश इन सर्कुलेशन' (बाजार में मौजूद कुल नकदी) आज भी रिकॉर्ड स्तर पर है। ग्रामीण इलाकों, असंगठित क्षेत्रों और त्योहारों/शादियों के सीजन में कैश की मांग बहुत ज्यादा रहती है। यानी समस्या देश में कैश की कमी की नहीं है, बल्कि बैंकों से निकलकर उस कैश को आपके नजदीकी एटीएम तक पहुंचाने वाले सिस्टम (Infrastructure) के कमजोर होने की है।

आम जनता क्या करे?

इस संभावित संकट से बचने के लिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि:

  1. केवल एटीएम के भरोसे रहने के बजाय अपने पास कुछ बैकअप कैश जरूर रखें।

  2. कैश निकालने के लिए पारंपरिक एटीएम के साथ-साथ अब बैंकों द्वारा लगाए जा रहे आधुनिक कैश रिसाइकलर (Cash Recyclers) मशीनों का उपयोग करें, जहां पैसे जमा और निकाले दोनों जा सकते हैं।

  3. छोटे और दैनिक भुगतानों के लिए पूरी तरह डिजिटल मोड या UPI का उपयोग करें ताकि आपकी फ्री एटीएम लिमिट बची रहे।