सोनम वांगचुक के 20वें दिन के अनशन को समर्थन देने के लिए 20 जुलाई को दिल्ली चलो !
देश के असली हीरो सोनम वांगचुक का अनशन आज 20वें दिन में। सरकार आखिर कब जागेगी?
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 20वां दिन: जानिए क्या हैं मांगें ?
देश के युवाओं के भविष्य, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए लड़ रहे सोनम वांगचुक का अनशन अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों (AISA, SFI, KYS) के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन को अब देश के शीर्ष विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज का भी बड़ा समर्थन मिल रहा है।
लद्दाख की पर्यावरण जंग के बाद, यह पहली बार है जब वांगचुक देश की राजधानी में छात्रों के अधिकारों के लिए इस तरह राष्ट्रीय स्तर पर मोर्चा संभाल रहे हैं।
1. क्यों भूख हड़ताल पर बैठे हैं सोनम वांगचुक? (The Core Demands)
सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया और अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया।
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शिक्षा मंत्री का इस्तीफा:
प्रतियोगी परीक्षाओं (विशेषकर NEET-UG और NET) में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं और पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। -
परीक्षा प्रणाली में सुधार:
देश की राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की साख को बहाल करने के लिए एक पूरी तरह से पारदर्शी और फुल-प्रूफ सिस्टम बनाया जाए। -
प्रणालीगत जवाबदेही: पेपर लीक माफियाओं और इस पूरे रैकेट के पीछे जिम्मेदार बड़ी मछलियों पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में करोड़ों छात्रों का भविष्य अंधकार में न जाए।
2. ताजा मेडिकल बुलेटिन: बिगड़ती सेहत और ऑर्गन डैमेज का खतरा
डॉक्टरों की टीम लगातार वांगचुक के स्वास्थ्य की चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है। 16-17 जुलाई को जारी मेडिकल अपडेट के अनुसार स्थिति चिंताजनक है। डॉक्टरों के मुताबिक, उपवास का पहला चरण (फैट बर्न होना) और दूसरा चरण (यूरिक एसिड का बढ़ना और मांसपेशियों का टूटना) पार हो चुका है।
3. दिल्ली हाई कोर्ट का दखल और सरकार का रुख
वांगचुक की बिगड़ती हालत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी, जिसमें उनके लिए तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि "जीवन अनमोल है" और केंद्र व दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना कड़ाई से निगरानी की जाए और जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल सहायता दी जाए।
4. 'चलो संसद': 20 जुलाई को बड़ा मार्च
वांगचुक ने अपने समर्थकों और देश की जनता से अपील की है कि वे उनके अनशन टूटने की चिंता करने के बजाय 20 जुलाई 2026 को होने वाले "चलो संसद" (Chalo Sansad) मार्च को मजबूत बनाएं।
यह तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन से संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session) शुरू हो रहा है।
5. विपक्षी नेताओं और मशहूर हस्तियों की अपील
14 से 17 जुलाई के बीच देश के कई बड़े राजनेताओं और हस्तियों ने वांगचुक से अनशन खत्म करने की भावुक अपील की है:
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ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं ने उनसे अपना उपवास तोड़ने का आग्रह किया है और कहा है कि देश को उनके जीवन की जरूरत है।
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किसान नेता राकेश टिकैत और कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने खुद जंतर-मंतर जाकर वांगचुक से मुलाकात की है।
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दिग्गज अभिनेत्री जीनत अमान और स्वरा भास्कर ने भी इस आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखाई है और सरकार से तुरंत बातचीत शुरू करने की मांग की है।
सोनम वांगचुक का यह आंदोलन अब महज एक अनशन नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के करोड़ों छात्रों के गुस्से और व्यवस्था में सुधार की मांग का प्रतीक बन चुका है। डॉक्टरों की गंभीर चेतावनियों के बावजूद 20 जुलाई के संसद मार्च तक डटे रहने का उनका संकल्प यह दिखाता है कि वह इस लड़ाई को उसके तार्किक अंत तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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