गुजरात: शेरों-तेंदुओं के हमलों के बीच वन रक्षकों की भारी कमी, वन मंत्री को भेजा गया पत्र

गुजरात में शेरों और तेंदुओं के बढ़ते हमलों के बीच वन विभाग में कर्मचारियों की भारी किल्लत सामने आई है। राज्य में हिंसक जानवरों की सुरक्षा और निगरानी के लिए मैदान में मात्र 1,799 वन रक्षक तैनात हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वन रक्षक कर्मचारी मंडल ने वन मंत्री को पत्र लिखकर खाली पदों को तुरंत भरने की मांग की है।

गुजरात: शेरों-तेंदुओं के हमलों के बीच वन रक्षकों की भारी कमी, वन मंत्री को भेजा गया पत्र

गुजरात: शेरों और तेंदुओं के बढ़ते हमलों के बीच वन रक्षकों की भारी कमी, कर्मचारी मंडल ने वन मंत्री को लिखा पत्र

गांधीनगर / अहमदाबाद:

गुजरात में जंगलों के आसपास के क्षेत्रों में शेरों और तेंदुओं के मानवीय आबादी पर बढ़ते हमलों के बीच वन विभाग की एक बड़ी चुनौती सामने आई है। राज्य में हिंसक जानवरों की बढ़ती संख्या की तुलना में उनकी सुरक्षा और निगरानी के लिए तैनात वन रक्षकों (Forest Guards) की भारी कमी देखी जा रही है।

हालिया रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में हिंसक प्राणियों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए मैदान में मात्र 1,799 वन रक्षक ही तैनात हैं। राज्य में शेरों और तेंदुओं की आबादी में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके चलते ग्रामीण व सीमावर्ती इलाकों में हमले की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

वन रक्षक कर्मचारी मंडल ने जताई चिंता

कर्मचारियों की इस भारी किल्लत को देखते हुए वन रक्षक कर्मचारी मंडल ने सीधे वन मंत्री को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। पत्र में मांग की गई है कि:

  • वन रक्षकों के खाली पदों को तुरंत प्रभाव से भरा जाए।

  • गश्त और सुरक्षा के लिए नई भर्तियों की प्रक्रिया तेज की जाए ताकि कर्मचारियों पर बढ़ रहे अतिरिक्त दबाव को कम किया जा सके।

  • जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों में रुख करने पर समय रहते काबू पाने के लिए मैदानी स्तर पर पर्याप्त बल तैनात किया जाए।

स्थानीय निवासियों और कर्मचारियों का मानना है कि यदि समय रहते वन रक्षकों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते इस संघर्ष को संभालना आने वाले दिनों में और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।