अमरनाथ यात्रा बनी देश की पहली 'जीरो-लैंडफिल' यात्रा !
इस बार श्री अमरनाथ यात्रा में केवल भक्ति का प्रवाह है, प्रदूषण का नहीं। 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के साथ यह बनी है देश की पहली 'जीरो-लैंडफिल' धार्मिक यात्रा।
अमरनाथ यात्रा: देश की पहली 'जीरो-लैंडफिल' धार्मिक यात्रा, 4 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल
हिमालय की सुरम्य वादियों में स्थित पवित्र श्री अमरनाथ गुफा की वार्षिक यात्रा इस बार आस्था और भक्ति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन और श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) ने इस साल की यात्रा को देश की पहली 'जीरो-लैंडफिल' (Zero Landfill / Zero Waste) धार्मिक यात्रा बनाने की पहल की है।
इस यात्रा में 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है, लेकिन इसके बावजूद यात्रा मार्ग से निकलने वाले किसी भी कचरे को खुले में फेंकने या लैंडफिल में डंप करने के बजाय शत-प्रतिशत रिसाइकल और प्रोसेस किया जा रहा है।
जीरो-लैंडफिल क्या है?
इसका सीधा अर्थ है कि यात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाला 100% कचरा (प्लास्टिक, गीला कचरा, जैविक अपशिष्ट आदि) पुनः चक्रित (Recycle) या प्रसंस्कृत (Process) किया जाएगा, जिससे हिमालय के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में शून्य प्रदूषण पहुंचे।
700 मीट्रिक टन कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन का मेगा प्लान
पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों पर यात्रा के दौरान लगभग 700 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान लगाया गया है। इस विशाल मात्रा को प्रबंधित करने के लिए व्यापक और हाई-टेक ढांचा तैयार किया गया है:
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सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध: प्लास्टिक की बोतलों, थर्माकोल और डिस्पोजेबल कटलरी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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मुफ्त कपड़े के थैले: प्लास्टिक थैलियों के स्थान पर श्रद्धालुओं को 1.5 लाख से अधिक कपड़े के बैग बांटे जा रहे हैं।
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वाटर एटीएम (Water ATMs): पैक्ड मिनरल वाटर की बोतलों का कचरा घटाने के लिए जगह-जगह वाटर एटीएम और शुद्ध पेयजल केंद्र स्थापित किए गए हैं।
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स्वच्छता सेनानी: यात्रा मार्ग की नियमित सफाई और कचरा पृथक्कीकरण के लिए हजारों स्वच्छता कार्यकर्ताओं और प्रबंधन कर्मियों को तैनात किया गया है।
कचरे से संसाधन: बायोगैस, बिजली और जैविक खाद
इस अनूठी पहल के तहत कचरे का केवल निपटान ही नहीं किया जा रहा, बल्कि उसे उपयोगी संसाधनों में बदला जा रहा है:
[एकत्रित कचरा] ──┬──> गीला कचरा एवं नारियल खोल ──> एयरोबिन/श्रेडर ──> उच्च गुणवत्ता जैविक खाद (Compost)
├──> खच्चर एवं घोड़ों का गोबर ──> बायोगैस प्लांट ──> बायोगैस एवं बिजली
└──> प्लास्टिक व सूखा कचरा ──> हाइड्रोलिक बेलर ──> रिसाइकलिंग इकाइयाँ
1. गोबर से बायोगैस और बिजली
यात्रा मार्ग पर हजारों की संख्या में चलने वाले घोड़ों और खच्चरों से उत्पन्न गोबर को एकत्र कर बायोगैस संयंत्रों में भेजा जा रहा है, जिससे ऊर्जा और बिजली उत्पन्न की जा रही है।
2. गीले कचरे और नारियल के खोल की प्रोसेसिंग
शिवभक्तों द्वारा उपयोग किए जाने वाले नारियल के खोल और शिविरों (लंगरों) से निकलने वाले गीले कचरे को 'एयरोबिन' (Aerobins) और शेडिंग यूनिट्स के माध्यम से खाद में बदला जा रहा है।
3. सूखे कचरे का हाइड्रोलिक कॉम्पेक्शन
प्लास्टिक और अन्य सूखे कचरे को हाइड्रोलिक बैलिंग मशीनों द्वारा दबाकर छोटे-छोटे बंडलों में बदला जाता है, जिन्हें रिसाइकलिंग के लिए मैदानी इलाकों में भेजा जा रहा है।
तकनीक और सहभागिता का अनूठा मॉडल
इस अभियान में देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की विशेषज्ञ संस्थाओं और कई गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की सेवाएं ली जा रही हैं। इसके अलावा, पूरे अपशिष्ट प्रबंधन चक्र की रियल-टाइम निगरानी के लिए विशेष डिजिटल एप्लीकेशन और डैशबोर्ड भी विकसित किए गए हैं।
आस्था के साथ पर्यावरण चेतना का संदेश
श्री अमरनाथजी यात्रा का यह 'स्वच्छ एवं हरित मॉडल' न केवल बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आ रहे लाखों श्रद्धालुओं को पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार के लिए प्रेरित कर रहा है, बल्कि देश भर की अन्य बड़ी धार्मिक यात्राओं (जैसे चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और कुंभ मेला) के लिए एक अनुकरणीय मिसाल भी पेश कर रहा है।
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