बदलता भारत, डिजिटल भारत! अब ग्रामीण सड़कों को मिलेगी अपनी 'डिजिटल पहचान' !
सरकार एक ऐसी कमाल की तकनीक ला रही है, जहां ग्रामीण सड़कों के मुहाने पर QR कोड लगाए जाएंगे।
QR कोड स्कैन करो और पहुंच जाओ गांव: ग्रामीण सड़कों को मिलेगी अब 'डिजिटल पहचान'
बदलते डिजिटल भारत में अब देश के ग्रामीण इलाकों की सूरत और सीरत दोनों बदलने वाली है। शहरी सड़कों, मेट्रो और हाईवे पर जीपीएस (GPS) नेविगेशन का इस्तेमाल तो आप सालों से कर रहे हैं, लेकिन अब देश के सुदूर गांवों और वहां तक जाने वाले रास्तों को भी एक अनोखी 'डिजिटल पहचान' मिलने जा रही है। सरकार एक ऐसी महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत ग्रामीण सड़कों को QR कोड (Quick Response Code) से जोड़ा जाएगा। अब बस एक साधारण सा स्कैन और आप बिना किसी से रास्ता पूछे सीधे अपने ग्रामीण गंतव्य तक पहुंच जाएंगे।
क्या है यह पूरी योजना और कैसे करेगी काम?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और राज्य सरकारों द्वारा बनाई गई ग्रामीण सड़कों की मॉनिटरिंग को मजबूत करना और आम जनता के लिए सफर को आसान बनाना है।
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सड़कों के मुहाने पर लगेंगे 'स्मार्ट बोर्ड': प्रत्येक ग्रामीण सड़क के मुख्य प्रवेश द्वार या चौराहे पर एक विशेष साइनबोर्ड लगाया जाएगा, जिस पर एक यूनिक QR कोड प्रिंटेड होगा।
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एक स्कैन में पूरी कुंडली: जब कोई यात्री या प्रशासनिक अधिकारी अपने स्मार्टफोन से इस QR कोड को स्कैन करेगा, तो उसके फोन पर उस सड़क की पूरी डिजिटल प्रोफाइल खुल जाएगी।
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लाइव रूट नेविगेशन: इस कोड को स्कैन करते ही गूगल मैप्स या सरकारी नेविगेशन ऐप के जरिए उस सड़क से जुड़े सभी गांवों का सटीक रूट मैप और लाइव लोकेशन यूजर के फोन पर आ जाएगी।
सिर्फ रास्ता ही नहीं, भ्रष्टाचार पर भी लगेगी लगाम!
यह डिजिटल पहल सिर्फ यात्रियों को रास्ता दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास में पारदर्शिता लाने का एक बड़ा हथियार बनेगी। QR कोड स्कैन करते ही मोबाइल स्क्रीन पर निम्नलिखित जानकारियां भी दिखाई देंगी:
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सड़क का विवरण: सड़क कब बनी, इसकी कुल लंबाई कितनी है और इसे किस तकनीक या सामग्री से बनाया गया है।
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लागत और ठेकेदार का नाम: इस सड़क को बनाने में कुल कितना सरकारी बजट खर्च हुआ और इसे बनाने वाले ठेकेदार या एजेंसी का नाम क्या है।
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गारंटी और मेंटेनेंस अवधि: सड़क की मेंटेनेंस (रखरखाव) की जिम्मेदारी कब तक की है।
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शिकायत दर्ज करने की सुविधा: यदि सड़क पर कोई गड्ढा है या गुणवत्ता खराब है, तो आम नागरिक उसी डिजिटल पोर्टल पर सीधे अपनी शिकायत और सड़क की फोटो अपलोड कर सकेंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलेगी रफ्तार
अक्सर देखा जाता है कि देश के कई हिस्सों में बेहतरीन हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद या खूबसूरत ऐतिहासिक स्थल (जैसे प्राचीन मंदिर या किले) ग्रामीण इलाकों में छिपे होते हैं, लेकिन सही रास्तों की जानकारी न होने के कारण पर्यटक या व्यापारी वहां तक नहीं पहुंच पाते।
विशेषज्ञों का मानना है कि: "सड़कों को डिजिटल पहचान मिलने से ग्रामीण पर्यटन (Rural Tourism) को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, किसानों को अपनी फसल और फल-सब्जियों को बड़े बाजारों या शहरों तक पहुंचाने के लिए लॉजिस्टिक्स और रूट प्लानिंग में बड़ी मदद मिलेगी।"
कब तक धरातल पर उतरेगी योजना?
शुरुआती चरण में इस परियोजना को कुछ चुनिंदा राज्यों के विकास खंडों (Blocks) में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। इसके सफल परीक्षण के बाद इसे राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू किया जाएगा, जिसके बाद देश की लाखों किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कें पूरी तरह से डिजिटल ग्रिड से जुड़ जाएंगी।
डिजिटल पेमेंट के बाद अब सड़कों का यह 'QR कोड रिवॉल्यूशन' ग्रामीण भारत को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
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