सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की भारत को धमकी !

जल युद्ध (Water War) की ओर बढ़ते कदम? पाकिस्तान के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बनी सिंधु नदी। क्या बातचीत से सुलझेगा यह नया विवाद या बढ़ेगा तनाव?

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की भारत को धमकी !

सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को सीधी सैन्य कार्रवाई और युद्ध की धमकी दी है। उन्होंने एक पाकिस्तानी समाचार चैनल (ARY News) को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि अगर पाकिस्तान की जल सुरक्षा पर कोई आंच आती है, तो इस्लामाबाद भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने से पीछे नहीं हटेगा।

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने पानी को देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा:

"जिस क्षण हमें लगेगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा — और पानी हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम हिस्सा है — खतरे में है, हम भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ देंगे। निश्चित रूप से।"

आसिफ ने आरोप लगाया कि भारत पानी को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में किसी भी तरह का बदलाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

तनाव बढ़ने की मुख्य वजहें

पाकिस्तान की इस बौखलाहट और आक्रामक बयानबाजी के पीछे दो मुख्य कारण हैं:

  • भारत द्वारा संधि को स्थगित (Abeyance) करना: अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसके जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए 1960 से चली आ रही सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया। भारत का साफ कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक यह निलंबन जारी रहेगा।

  • भारतीय जल शक्ति मंत्री का बयान: हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि भारत अपनी नदियों के पानी का इस्तेमाल अपने राष्ट्रीय हित में करेगा और जून 2028 तक पाकिस्तान की ओर जाने वाले सिंधु तंत्र के पानी को पूरी तरह से रोका जा सकता है।

पाकिस्तान के लिए क्यों है यह जीवन-मरण का प्रश्न?

सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को सिंधु बेसिन का करीब 80% पानी मिलता है। भारत के सख्त रुख के कारण पाकिस्तान में भारी हड़कंप है:

  • कृषि और खाद्य सुरक्षा पर संकट: पाकिस्तान की 22 करोड़ से अधिक की आबादी और उसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। सिंधु नदी का पानी बंद या कम होने से गेहूं, धान और गन्ने की फसलों को भारी नुकसान होगा।

  • कपड़ा उद्योग (Textile Industry) तबाह होने का डर: पाकिस्तान का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर टेक्सटाइल (Textile) है, जो कपास की खेती पर टिका है। कपास की सिंचाई सिंधु नदी के पानी से होती है। इस संकट से पाकिस्तान को सालाना करीब 16 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान हो सकता है, जो उसकी जीडीपी का लगभग 8% है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आरोप लगाया था कि भारत सिंधु नदी प्रणाली पर करीब 17 ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिससे वह 'हाइड्रो हेजेमनी' (जल प्रभुत्व) हासिल कर सकता है। हालांकि, भारत का स्टैंड स्पष्ट है कि आतंकवाद और बातचीत (या समझौते) एक साथ नहीं चल सकते।