क्या है PAX Silica? समझें पूरा खेल !

PAX Silica: रेयर अर्थ और चिप सप्लाई चेन पर चीन के एकाधिकार को खत्म करने के लिए भारत-अमेरिका समेत 11 देशों का एक शक्तिशाली रणनीतिक गठबंधन है। यह गठजोड़ भविष्य की तकनीक और संसाधनों पर चीन की 'ब्लैकमेलिंग' और 'दादागिरी' को पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

क्या है PAX Silica? समझें पूरा खेल !

दुनिया के नक्शे पर एक नई आर्थिक और सामरिक लकीर खिंच चुकी है। चीन के 'रेयर अर्थ' (Rare Earth) एकाधिकार और उसकी 'सप्लाई चेन दादागिरी' को चुनौती देने के लिए PAX Silica (पैक्स सिलिका) नाम का एक शक्तिशाली गठबंधन सामने आया है।

20 फरवरी 2026 को भारत ने आधिकारिक तौर पर इस अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होकर पूरी दुनिया को एक कड़ा संदेश दिया है। आइए जानते हैं क्या है PAX Silica और यह कैसे चीन के दबदबे को खत्म करेगा।


क्या है PAX Silica? (आसान शब्दों में)

'Pax' का अर्थ है शांति और 'Silica' सेमीकंडक्टर चिप्स का आधार है। PAX Silica एक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, और रेयर अर्थ मिनरल्स की एक ऐसी सुरक्षित सप्लाई चेन बनाना है, जिस पर किसी एक देश (चीन) का नियंत्रण न हो।

इसे आधुनिक युग का 'G7' कहा जा रहा है, जो डिजिटल और तकनीकी दुनिया के लिए कच्चे माल से लेकर फाइनल चिप तक के रास्ते को सुरक्षित करेगा।


चीन की 'दादागिरी' पर चोट: ये 11 देश क्यों आए साथ ?

अब तक रेयर अर्थ मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, और गैलियम) के मामले में चीन दुनिया का एकछत्र राजा बना हुआ था। वह अक्सर अपनी इस ताकत का इस्तेमाल दूसरे देशों को धमकाने के लिए करता रहा है।

इस एकाधिकार को तोड़ने के लिए 11 (और अन्य सहयोगी) देशों ने हाथ मिलाया है:

  1. अमेरिका (तकनीकी नेतृत्व)

  2. भारत (टैलेंट हब और मार्केट)

  3. जापान (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग)

  4. ऑस्ट्रेलिया (खनिज संसाधनों का भंडार)

  5. दक्षिण कोरिया (सेमीकंडक्टर किंग)

  6. ब्रिटेन 7. इजरायल

  7. सिंगापुर

  8. यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE)

  9. कतर

  10. ग्रीस

 इनके अलावा नीदरलैंड्स और ताइवान जैसे देश भी इस इकोसिस्टम के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।


भारत के लिए क्यों जरूरी है यह गठबंधन?

भारत का 'PAX Silica' में शामिल होना एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इसके 3 बड़े फायदे होंगे:

  • सेमीकंडक्टर मिशन को रफ्तार: भारत में बन रहे चिप प्लांट्स को अब बिना किसी बाधा के कच्चा माल और अमेरिकी तकनीक मिल सकेगी।

  • चीन पर निर्भरता खत्म: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और डिफेंस उपकरणों के लिए भारत को अब चीन के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।

  • ग्लोबल टेक हब: भारत अब सिर्फ एक मार्केट नहीं, बल्कि चिप डिजाइनिंग और एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर का ग्लोबल सेंटर बनेगा।


चीन को सीधा संदेश: 'Weaponised Dependency' का अंत

अमेरिकी अधिकारियों ने इस गठबंधन पर हस्ताक्षर करते समय साफ कहा कि अब "Weaponised Dependency" (हथियार के रूप में निर्भरता का इस्तेमाल) नहीं चलेगी। चीन अक्सर सप्लाई रोककर ब्लैकमेल करता था, लेकिन अब 'पैक्स सिलिका' के देश आपस में संसाधनों का आदान-प्रदान करेंगे, जिससे चीन की पकड़ ढीली होगी।

"हम भविष्य के पूरे 'टेक स्टैक' को सुरक्षित कर रहे हैं—जमीन के नीचे दबे खनिजों से लेकर इंसानी क्षमता को बढ़ाने वाली इंटेलिजेंस (AI) तक।"


PAX Silica सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि एक नया वर्ल्ड ऑर्डर है। यह गठबंधन यह सुनिश्चित करेगा कि 21वीं सदी की तकनीक पर किसी एक देश की तानाशाही न चले। भारत का इसमें शामिल होना प्रधानमंत्री मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक बड़ा कदम है।