ड्रग माफियाओं पर गुजरात पुलिस का सर्जिकल स्ट्राइक !
5 साल, ₹13,600 करोड़ का नशा जब्त और 5,300 से ज्यादा तस्कर सलाखों के पीछे। नशे के सौदागरों के लिए गुजरात में नो एंट्री!
गुजरात में ड्रग्स के खिलाफ मेगा एक्शन: 5 साल में ₹13,600 करोड़ का नशा जब्त, हजारों तस्कर जेल में
नशे के सौदागरों और अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफियाओं के खिलाफ गुजरात सरकार और गुजरात पुलिस ने चौतरफा युद्ध छेड़ रखा है। 'ड्रग-फ्री गुजरात' (नशामुक्त गुजरात) के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य पुलिस ने पिछले 5 वर्षों में अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की है। हाल ही में सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गुजरात पुलिस ने विभिन्न ऑपरेशन्स के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में ₹13,600 करोड़ से अधिक मूल्य का 1.36 लाख किलोग्राम से ज्यादा ड्रग्स जब्त किया है।
इस कड़े अभियान ने न केवल देश के भीतर फैले नशे के जाल को तोड़ा है, बल्कि समुद्री और सीमावर्ती रास्तों से होने वाली अंतरराष्ट्रीय स्मगलिंग नेटवर्क की भी कमर तोड़ दी है।
5,300 से अधिक आरोपी सलाखों के पीछे
गुजरात पुलिस की मुस्तैदी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल ड्रग्स जब्त ही नहीं किया गया, बल्कि इसके पीछे काम करने वाले सिंडिकेट को भी नेस्तनाबूद किया गया है। पिछले 5 वर्षों में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 5,346 से अधिक ड्रग तस्करों और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इनमें कई स्थानीय पैडलर्स के साथ-साथ बड़े अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया भी शामिल हैं।
हाईटेक तकनीक से लैस हुई गुजरात पुलिस
आधुनिक युग के ड्रग माफिया जहां एक तरफ डिजिटल और अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं, वहीं गुजरात पुलिस भी उनसे दो कदम आगे नजर आ रही है।
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NARIT सॉफ्टवेयर: अपराधियों की प्रोफाइलिंग और उनके क्रेडेंशियल्स/कनेक्शन्स को ट्रैक करने के लिए गुजरात पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित 'NARIT' सॉफ्टवेयर तैयार किया है। ऐसा करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य बन गया है।
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सख्त निगरानी: पाकिस्तान और खाड़ी देशों से सटे समुद्री मार्गों (सी-रूट) पर गुजरात एटीएस (ATS), इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) और स्थानीय पुलिस संयुक्त अभियान चलाकर लगातार बड़ी खेप पकड़ रही हैं।
देश की पहली 'ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी'
नशे के खिलाफ इस जंग को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए गुजरात सरकार ने एक और बड़ा और नीतिगत फैसला लिया है। गुजरात देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने आधिकारिक तौर पर 'ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी' (नशीले पदार्थों की सूचना देने और पकड़वाने पर इनाम की नीति) लागू की है।
इसके साथ ही, अपनी जान जोखिम में डालकर अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट का पर्दाफाश करने वाले जांबाज पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए सरकार ने 'आउट ऑफ टर्न' प्रमोशन (समय से पहले पदोन्नति) देने की नीति भी अपनाई है।
"नो टॉलरेंस, नो कॉम्प्रोमाइज" गुजरात के गृह विभाग का स्पष्ट मानना है कि युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाले इस 'जहर' के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी। पुलिस न केवल गुजरात में ड्रग्स की एंट्री रोक रही है, बल्कि देश के अन्य राज्यों (जैसे राजस्थान, मुंबई, दिल्ली) में जाने वाली खेप को भी गुजरात की सीमाओं के भीतर ही दबोच रही है।
₹13,600 करोड़ की रिकॉर्ड ड्रग्स जब्ती और हजारों आरोपियों की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि गुजरात पुलिस अब ड्रग माफियाओं के लिए काल बन चुकी है। तकनीक के सही इस्तेमाल, सख्त सरकारी नीतियों और सुरक्षा एजेंसियों के सटीक समन्वय से गुजरात आज देश के सामने एंटी-नारकोटिक्स अभियान का एक बेहतरीन मॉडल पेश कर रहा है।
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