अश्वगंधा की पत्तियों पर बैन! क्यों डरा हुआ है FSSAI?
आयुर्वेद में सिर्फ जड़ है 'सुपरफूड', पत्तियां बढ़ा सकती हैं लीवर की परेशानी।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लेते हुए आहार पूरक (Dietary Supplements) और खाद्य पदार्थों में अश्वगंधा की पत्तियों (Ashwagandha Leaves) के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में अश्वगंधा की जड़ों का महत्व सदियों से रहा है, लेकिन पत्तियों पर लगी यह रोक चर्चा का विषय बनी हुई है।
1. वैज्ञानिक डेटा और सुरक्षा का अभाव
FSSAI के अनुसार, अश्वगंधा की जड़ों (Roots) के स्वास्थ्य लाभों और सुरक्षा पर पर्याप्त वैज्ञानिक शोध उपलब्ध हैं, लेकिन पत्तियों के मानव उपभोग (Human Consumption) के लिए सुरक्षित होने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं।
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प्राधिकरण का मानना है कि पत्तियों के दीर्घकालिक इस्तेमाल से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर अभी तक कोई पुख्ता डेटा मौजूद नहीं है।
2. टॉक्सिसिटी (विषाक्तता) का खतरा
अश्वगंधा की पत्तियों में कुछ ऐसे रासायनिक यौगिक (Chemical Compounds) पाए जाते हैं, जो जड़ों की तुलना में बहुत अधिक सक्रिय होते हैं।
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कुछ शोधों में यह संकेत मिले हैं कि पत्तियों का अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन करने से लीवर (Liver) पर बुरा असर पड़ सकता है।
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पत्तियों में मौजूद 'विदानोलाइड्स' (Withanolides) की सांद्रता जड़ों से अलग होती है, जो सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरी हो सकती है।
3. आयुर्वेदिक ग्रंथों का हवाला
परंपरागत रूप से आयुर्वेद में 'अश्वगंधा' शब्द का तात्पर्य इसकी जड़ से लिया जाता है।
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अधिकांश प्राचीन ग्रंथों और फार्माकोपिया में केवल जड़ के पाउडर या अर्क के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है।
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पत्तियों का उपयोग पारंपरिक रूप से केवल बाहरी उपचार (जैसे घाव भरने या त्वचा रोगों) के लिए किया जाता रहा है, न कि आंतरिक सेवन के लिए।
4. मिलावट पर लगाम
बाजार में अश्वगंधा की मांग बहुत अधिक है। जड़ों की तुलना में पत्तियां सस्ती और आसानी से उपलब्ध होती हैं।
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कई कंपनियां लागत कम करने के लिए अश्वगंधा पाउडर में पत्तियों की मिलावट कर रही थीं।
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FSSAI के इस कदम से उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और उपभोक्ताओं को केवल असली और सुरक्षित सप्लीमेंट्स ही मिलेंगे।
अब क्या होगा?
FSSAI ने साफ किया है कि:
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कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स में केवल अश्वगंधा की जड़ों का ही इस्तेमाल कर सकती हैं।
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अगर किसी प्रोडक्ट में पत्तियों का इस्तेमाल किया गया है, तो उसे बाजार से हटाना होगा या फॉर्मूला बदलना होगा।
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दवा और सप्लीमेंट लेबल पर अब स्पष्ट जानकारी देनी होगी।
यह फैसला किसी जड़ी-बूटी के खिलाफ नहीं, बल्कि उपभोक्ता सुरक्षा के लिए लिया गया है। यदि आप अश्वगंधा का सेवन कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह प्रमाणित ब्रांड का हो और उसमें केवल 'Root Extract' का ही प्रयोग किया गया हो।
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