पश्चिम बंगाल में 7 इलेक्शन ऑर्ब्जवर बंधक, सुप्रीम कोर्ट नाराज:कहा- उन्हें खाना-पानी तक नहीं मिला !
पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों के साथ जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अब राज्य की कानून-व्यवस्था चर्चा के केंद्र में है।
सुप्रीम कोर्ट की बंगाल सरकार को फटकार: मालदा में जजों को बंधक बनाने पर जताई कड़ी नाराजगी
पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और न्यायिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मालदा जिले में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे 7 न्यायिक अधिकारियों (जिनमें 3 महिलाएं शामिल थीं) को भीड़ द्वारा घंटों बंधक बनाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जमकर लताड़ लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
1 अप्रैल 2026 को मालदा के कालियाचक ब्लॉक-2 में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (BDO) का घेराव किया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नियुक्त न्यायिक अधिकारी वहां अपीलों की सुनवाई कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को कार्यालय के भीतर ही 9 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाए रखा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों ने सुरक्षा की गुहार लगाई, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस की ओर से तत्काल कार्रवाई नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां
आज हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने बंगाल सरकार के अधिकारियों के प्रति "अत्यधिक निराशा" व्यक्त की। कोर्ट की मुख्य बातें निम्नलिखित रहीं:
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"सबसे ध्रुवीकृत राज्य": अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "हमने इतना राजनीतिक रूप से ध्रुवीकृत राज्य कभी नहीं देखा। यहाँ तक कि निष्पक्ष माने जाने वाले न्यायिक अधिकारियों को भी नहीं बख्शा जा रहा है।"
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प्रशासनिक विफलता: कोर्ट ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और DGP से सवाल किया कि पूर्व सूचना होने के बावजूद अधिकारियों को सुरक्षित निकालने में देरी क्यों हुई?
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सुनियोजित साजिश: सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने का एक "सुनियोजित और प्रेरित" प्रयास बताया।
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केंद्रीय बलों की तैनाती: कोर्ट ने आदेश दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए चुनाव आयोग न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों (Central Forces) की तैनाती सुनिश्चित करे।
जांच के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि इस हमले की जांच या तो CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) या NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंपी जाए, ताकि दोषियों और इसके पीछे की साजिश का पर्दाफाश हो सके।
मालदा की इस घटना ने बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की यह 'फटकार' राज्य प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि न्यायपालिका और चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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