ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा जीएसटी कलेक्शन, पहली बार ₹2 लाख करोड़ के पार !
भारत के GST राजस्व ने ₹2 लाख करोड़ की ऐतिहासिक सीमा को लांघ लिया है। सालाना आधार पर 8.8% की यह वृद्धि दर्शाती है कि घरेलू उपभोग और टैक्स अनुपालन (Compliance) दोनों में सुधार हुआ है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह ने पहली बार ₹2 लाख करोड़ के ऐतिहासिक जादुई आंकड़े को पार कर लिया है। मार्च 2026 में सकल जीएसटी राजस्व ₹2,00,064 करोड़ दर्ज किया गया है, जो देश की आर्थिक प्रगति में एक नया मील का पत्थर है।
यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 8.8% की शानदार वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है। यह उपलब्धि न केवल सरकार के राजस्व में वृद्धि का संकेत है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब एक बड़े और स्थिर आधार पर खड़ी है।
राजस्व संग्रह के मुख्य आकर्षण
इस ऐतिहासिक कलेक्शन में कई सकारात्मक पहलू देखने को मिले हैं। विशेष रूप से आयातित वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स में 17.8% की जबरदस्त वृद्धि हुई है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की बढ़ती सक्रियता को दर्शाती है। वहीं, घरेलू लेनदेन (Domestic Transactions) में भी निरंतर मजबूती बनी हुई है।
यदि हम पूरे वित्त वर्ष (2025-26) की बात करें, तो कुल ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन ₹22.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले इसमें कुल 8.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस औसत के साथ अब मासिक संग्रह का आधार ₹1.85 लाख करोड़ के आसपास पहुंच गया है।
राज्यों का प्रदर्शन
देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों ने इस रिकॉर्ड कलेक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों ने दहाई अंकों (Double Digit) में वृद्धि दर्ज की है। महाराष्ट्र में संग्रह में 17% की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि तेलंगाना में 19% की बढ़त रही। यह दर्शाता है कि आर्थिक गतिविधियों का विस्तार पूरे देश में समान रूप से हो रहा है।
इस रिकॉर्ड कलेक्शन के पीछे के कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐतिहासिक वृद्धि के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:
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उपभोग में वृद्धि: त्योहारों के बाद भी घरेलू मांग और लोगों की खरीदारी की क्षमता में निरंतरता बनी हुई है।
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तकनीकी सुधार: जीएसटी नेटवर्क (GSTN) में सुधार और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से कर चोरी रोकना संभव हुआ है। "ई-इनवॉइसिंग" और सख्त अनुपालन (Compliance) ने करदाताओं को अधिक अनुशासित बनाया है।
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औपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार: छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों (MSMEs) का तेजी से औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनना राजस्व बढ़ने का एक बड़ा कारण है।
अर्थव्यवस्था के लिए इसके मायने
जीएसटी संग्रह का ₹2 लाख करोड़ के पार जाना यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब एक "नए सामान्य" (New Normal) में प्रवेश कर चुकी है। इस बढ़ते राजस्व से सरकार को विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर अधिक खर्च करने की शक्ति मिलेगी। साथ ही, यह वैश्विक निवेशकों को भारत की वित्तीय स्थिरता और विकास की संभावनाओं के प्रति एक ठोस संदेश भेजता है।
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