चारधाम यात्रा 2026: ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन और रूट की पूरी जानकारी
चारधाम यात्रा के लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन हरिद्वार और ऋषिकेश के केंद्रों पर आधार कार्ड के जरिए कराया जा सकता है। यात्रा का सही क्रम यमुनोत्री से शुरू होकर गंगोत्री, केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम है।
चारधाम यात्रा 2026: कैसे कराएं ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन? जानें यात्रा का पूरा रूट और जरूरी नियम
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए हर साल लाखों लोग देवभूमि पहुँचते हैं। जहाँ अधिकांश श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण (Registration) को प्राथमिकता देते हैं, वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा तलाशते हैं।
यहाँ ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और यात्रा रूट की पूरी जानकारी दी गई है:
ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे कराएं?
उत्तराखंड सरकार ने उन यात्रियों के लिए ऑफलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की है जो तकनीक से ज्यादा परिचित नहीं हैं या अंतिम समय में यात्रा का मन बनाते हैं।
-
पंजीकरण केंद्र: ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए हरिद्वार और ऋषिकेश मुख्य केंद्र हैं।
-
हरिद्वार: राही होटल (निकट बस स्टैंड/रेलवे स्टेशन)।
-
ऋषिकेश: आईएसबीटी (ISBT) ऋषिकेश और ट्रांजिट कैंप।
-
-
जरूरी दस्तावेज: रजिस्ट्रेशन के लिए आपके पास एक आधार कार्ड या कोई भी वैध सरकारी फोटो पहचान पत्र (जैसे वोटर आईडी या पैन कार्ड) होना अनिवार्य है।
-
बायोमेट्रिक प्रक्रिया: केंद्र पर जाकर आपको अपनी फोटो खिंचवानी होगी और अपनी जानकारी दर्ज करानी होगी। इसके बाद आपको एक 'यात्रा पास' (Yatra Card) जारी किया जाएगा।
-
सावधानी: ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए लंबी लाइनें हो सकती हैं, इसलिए सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहता है। साथ ही, प्रतिदिन के कोटा के आधार पर ही रजिस्ट्रेशन किए जाते हैं।
चारधाम यात्रा का सही रूट (Route Map)
शास्त्रों के अनुसार, चारधाम यात्रा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में करनी चाहिए। यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से होकर बद्रीनाथ पर समाप्त होती है।
1. हरिद्वार/ऋषिकेश से यमुनोत्री (पहला पड़ाव)
-
सबसे पहले आपको हरिद्वार या ऋषिकेश से बड़कोट होते हुए जानकीचट्टी पहुंचना होगा। यहाँ से यमुनोत्री धाम के लिए पैदल चढ़ाई शुरू होती है।
2. यमुनोत्री से गंगोत्री (दूसरा पड़ाव)
-
यमुनोत्री के दर्शन के बाद वापस बड़कोट आएं और फिर उत्तरकाशी के रास्ते गंगोत्री धाम पहुंचें। यहाँ गंगा के दर्शन और पूजन किया जाता है।
3. गंगोत्री से केदारनाथ (तीसरा पड़ाव)
-
गंगोत्री से वापस आकर श्रीनगर (उत्तराखंड) या रुद्रप्रयाग होते हुए गुप्तकाशी या सोनप्रयाग पहुंचें। यहाँ से गौरीकुंड के रास्ते बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए पैदल या हेलीकॉप्टर से जाया जाता है।
4. केदारनाथ से बद्रीनाथ (अंतिम पड़ाव)
-
केदारनाथ से नीचे उतरकर आप जोशीमठ के रास्ते बद्रीनाथ धाम पहुँचते हैं। अलकनंदा के किनारे स्थित भगवान विष्णु के इस धाम के दर्शन के साथ यात्रा संपन्न होती है।
यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण टिप्स
-
स्वास्थ्य जांच: चारधाम काफी ऊंचाई पर स्थित हैं, इसलिए अपनी सेहत का ख्याल रखें और पर्याप्त गर्म कपड़े साथ रखें।
-
सड़क की स्थिति: पहाड़ी इलाकों में यात्रा के दौरान स्थानीय प्रशासन की गाइडलाइंस का पालन करें और रात में सफर करने से बचें।
-
स्मार्ट कार्ड: अपने पास को हमेशा साथ रखें, क्योंकि यात्रा मार्ग पर जगह-जगह इसकी जांच की जा सकती है।
चारधाम यात्रा के दौरान भीड़ को देखते हुए सरकार समय-समय पर स्लॉट सीमित कर देती है, इसलिए निकलने से पहले ताजा समाचार जरूर चेक कर लें।
Matrimonial

BRG News 


