गुजरात में बढ़ने वाली हैं सीटें! विधानसभा 273 और लोकसभा होगी 39?

गुजरात की राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। नए परिसीमन (Delimitation) के बाद गुजरात में लोकसभा सीटें 26 से बढ़कर 39 और विधानसभा सीटें 182 से बढ़कर सीधे 273 होने की संभावना है!

गुजरात में बढ़ने वाली हैं सीटें! विधानसभा 273 और लोकसभा होगी 39?

बड़ा बदलाव: गुजरात में लोकसभा सीटें बढ़कर 39 और विधानसभा की 273 होने की संभावना; बदल जाएगा राज्य का राजनीतिक नक्शा

भारत के चुनावी इतिहास में एक और बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा नवे परिसीमन (Delimitation) और 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023' (महिला आरक्षण कानून) को पूरी तरह लागू करने की प्रशासनिक कवायद शुरू कर दी गई है। यदि यह नई व्यवस्था अंतिम रूप लेती है, तो साल 1975 के बाद गुजरात के राजनीतिक नक्शे में यह अब तक का सबसे बड़ा और युगांतरकारी बदलाव होगा।

प्रशासनिक सूत्रों और हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नए परिसीमन के बाद गुजरात में लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 26 से बढ़कर 39 हो सकती है। वहीं, राज्य की विधानसभा सीटों का आंकड़ा भी 182 से छलांग लगाकर सीधे 273 तक पहुंच सकता है।

क्यों हो रहा है यह बदलाव?

इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण काम कर रहे हैं:

  1. नया परिसीमन (Delimitation): देश की बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जा रहा है।

  2. महिला आरक्षण का क्रियान्वयन: 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023' के तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की जानी हैं। सीटों की संख्या बढ़ने से मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में पुरुष और महिला प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाना आसान हो जाएगा।

इसके लिए राज्य चुनाव आयोग और विभिन्न जिला कलेक्टर कार्यालयों में प्राथमिक स्तर पर प्रशासनिक तैयारियां और डेटा संकलन का काम पहले ही शुरू हो चुका है।

प्रमुख शहरों की 10 बड़ी सीटों का हो सकता है विभाजन

नए परिसीमन का सबसे ज्यादा असर गुजरात के उन शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों पर पड़ेगा, जहाँ पिछले दो दशकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट और गांधीनगर जैसे महानगरों की करीब 10 बड़ी लोकसभा और उनसे जुड़ी विधानसभा सीटों का विभाजन (भाग पड़ना) लगभग तय माना जा रहा है।

  • अहमदाबाद और सूरत का दायरा बदलेगा: अहमदाबाद पूर्व, अहमदाबाद पश्चिम, सूरत और नवસારી जैसी भारी आबादी वाली लोकसभा सीटों को विभाजित कर नई सीटें सृजित की जा सकती हैं।

  • गांधीनगर और वडोदरा: इन वीआईपी सीटों की सीमाओं में भी बड़ा फेरबदल होगा। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़कर या शहरी हिस्सों को अलग कर नए चुनावी क्षेत्र अस्तित्व में आएंगे।

  • शहरी क्षेत्रों का दबदबा: चूंकि जनसंख्या वृद्धि ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरों में ज्यादा हुई है, इसलिए नए नक्शे में शहरी और अर्ध-शहरी सीटों का प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा।

क्या होगा सीटों का नया गणित?

नीचे दी गई तालिका से समझिए कि परिसीमन के बाद गुजरात के चुनावी ढांचे में कितना बड़ा अंतर आने वाला है:

सदन का नाम वर्तमान सीटें परिसीमन के बाद संभावित सीटें अनुमानित वृद्धि
लोकसभा (संसद) 26 39 +13 सीटें
विधानसभा (विधायक) 182 273 +91 सीटें

इसके साथ ही, सीटों की संख्या बढ़ने के अनुपात में गुजरात से राज्यसभा सांसदों (Rajya Sabha Seats) की संख्या में भी आनुपातिक बढ़ोतरी देखी जाएगी।

राजनीतिक नक्शा और समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे

इस ऐतिहासिक फेरबदल के कारण कई मौजूदा चुनावी क्षेत्र हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएंगे (रद्द हो जाएंगे), जबकि कई नए निर्वाचन क्षेत्र नक्शे पर उभरेंगे।

  • नेताओं की पारंपरिक सुरक्षित सीटें बदलेंगी: निर्वाचन क्षेत्रों की भौगोलिक सीमाएं बदलने से कई दिग्गज नेताओं को अपनी पारंपरिक सीटों से हाथ धोना पड़ सकता है या नए वोट बैंक के हिसाब से रणनीति बदलनी होगी।

  • पार्टियों को करनी होगी नई कसरत: बीजेपी, कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों को नए सिरे से हर बूथ और नए वार्ड के जातिगत व सामाजिक समीकरणों का अध्ययन करना होगा।

  • संगठनात्मक ढांचा: इतनी बड़ी संख्या में सीटें बढ़ने से राजनीतिक दलों को अपने जमीनी संगठनों का विस्तार करना होगा, जिससे नए और युवा चेहरों को राजनीति में आने का बड़ा मौका मिलेगा।

गुजरात में शुरू हुई इस प्रशासनिक हलचल ने राज्य के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज कर दी है। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया बेहद सूक्ष्म और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी, लेकिन यह तय है कि आने वाले समय में गुजरात का वोटर एक बिल्कुल नए राजनीतिक परिदृश्य का गवाह बनेगा।