डिजिटल चक्रव्यूह: ईरान का अपना ही नेटवर्क बना उसका काल ?

इज़रायल ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरों और मोबाइल नेटवर्क को हैक कर एक अभेद्य 'डिजिटल जाल' बिछा दिया है। इसी साइबर सेंधमारी और AI तकनीक के जरिए मोसाद, ईरान के सुप्रीम लीडर और कमांडरों की पल-पल की सटीक लोकेशन ट्रैक कर रहा है।

डिजिटल चक्रव्यूह: ईरान का अपना ही नेटवर्क बना उसका काल ?

हैक किए तेहरान के ट्रैफिक कैमरे और मोबाइल नेटवर्क... यूं ही नहीं इज़रायल के पास थी खामेनेई की सबसे सटीक लोकेशन!

मिडल ईस्ट की जंग अब सिर्फ मिसाइलों और टैंकों तक सीमित नहीं रह गई है। यह लड़ाई अब 'बाइट्स' और 'कोड' के जरिए लड़ी जा रही है। हाल ही में जिस तरह इज़रायल ने ईरान के भीतर घुसकर सटीक स्ट्राइक की हैं, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। सवाल यह है कि आखिर मोसाद (Mossad) और इज़रायली यूनिट 8200 को यह कैसे पता चलता है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई या हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर किस पल, किस कमरे में मौजूद हैं?

इसका जवाब छिपा है तेहरान की सड़कों पर लगे ट्रैफिक कैमरों और वहां के मोबाइल नेटवर्क की हैकिंग में।

तेहरान के ट्रैफिक कैमरे: मोसाद की 'तीसरी आंख'

इज़रायली इंटेलिजेंस ने तेहरान के 'स्मार्ट सिटी' इन्फ्रास्ट्रक्चर में सेंध लगा दी है। तेहरान की सड़कों पर लगे हजारों CCTV और ट्रैफिक कंट्रोल कैमरों को हैक करके इज़रायल ने एक ऐसा 'विजुअल नेटवर्क' तैयार किया है, जिससे किसी भी वीआईपी मूवमेंट को ट्रैक करना आसान हो गया है।

  • फेसियल रिकग्निशन: इन कैमरों के जरिए मोसाद के सर्वर असली समय (Real-time) में चेहरे पहचान सकते हैं।

  • कॉन्वे ट्रैकिंग: जब भी खामेनेई या किसी बड़े कमांडर का काफिला निकलता है, तो ट्रैफिक कैमरों का डेटा यह बता देता है कि काफिला किस दिशा में मुड़ा और किस सेफ हाउस में दाखिल हुआ।

 मोबाइल नेटवर्क और 'सिग्नल इंटेलिजेंस'

मोबाइल फोन दुनिया का सबसे बड़ा जासूस है। इज़रायल की साइबर यूनिट्स (जैसे Unit 8200) ने ईरान के टेलीकॉम नेटवर्क में ऐसी पैठ बनाई है कि वे किसी भी स्पेसिफिक सिम कार्ड को ट्रैक कर सकते हैं।

  • सेल टॉवर ट्रायंगुलेशन: भले ही जीपीएस बंद हो, मोबाइल जिस टावर से कनेक्ट होता है, उससे सटीक लोकेशन का पता लगाया जा सकता है।

  • पेगासस जैसे स्पाइवेयर: रिपोर्टों के अनुसार, टारगेटेड अधिकारियों के फोन में ऐसे मैलवेयर इंजेक्ट किए गए जो फोन के बंद होने पर भी उसका माइक्रोफोन और कैमरा ऑन रख सकते हैं।

'डिजिटल फुटप्रिंट' से मौत तक का सफर

इज़रायल सिर्फ डेटा इकट्ठा नहीं करता, बल्कि उसे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए प्रोसेस करता है।

  1. पैटर्न एनालिसिस: खामेनेई कब नमाज पढ़ने जाते हैं, कब मीटिंग करते हैं—AI इन आदतों का एक पैटर्न बना लेता है।

  2. द प्रिसिजन स्ट्राइक: जैसे ही टारगेट उस लोकेशन पर पहुंचता है जिसे पहले से ही डिजिटल मैप पर मार्क किया गया है, इज़रायल अपने 'हंटर-किलर' ड्रोन्स या मिसाइल को सिग्नल भेज देता है।

अंदरूनी गद्दार और 'ह्यूमिंट' (HUMINT)

सिर्फ तकनीक ही काफी नहीं है। तकनीकी हैकिंग के साथ-साथ इज़रायल ने ईरान के सुरक्षा घेरे में बैठे 'अपनों' को भी अपने पाले में किया है। ये लोग फिजिकल तौर पर उन डिवाइसेस या फाइबर ऑप्टिक्स लाइनों में 'बग' (Bug) फिट करते हैं, जिन्हें दूर से हैक करना नामुमकिन होता है।

ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह जिस दुश्मन से लड़ रहा है, वह दिखाई नहीं देता। इज़रायल ने तेहरान की डिजिटल नसों में अपना जहर घोल दिया है। जब तक ईरान अपने पूरे डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को स्क्रैप करके नया नहीं बनाता, तब तक खामेनेई समेत हर बड़ा चेहरा इज़रायल की स्क्रीन पर एक 'ब्लिंकिंग डॉट' बना रहेगा।