अयोध्या में स्थापित होगा दुनिया का पहला 'श्री राम यंत्र' !
अयोध्या में स्थापित होने जा रहा 'श्री राम यंत्र' केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय ज्योतिष और वास्तु शास्त्र का एक सुरक्षा कवच है।
अयोध्या में स्थापित होगा दुनिया का पहला 'श्री राम यंत्र': जानिए इसका ज्योतिषीय और आध्यात्मिक रहस्य
अयोध्या, जो वर्तमान में वैश्विक आध्यात्मिकता का केंद्र बन चुकी है, जल्द ही एक और कीर्तिमान स्थापित करने जा रही है। राम जन्मभूमि परिसर में दुनिया के पहले और सबसे भव्य 'श्री राम यंत्र' की स्थापना की तैयारी है। माना जा रहा है कि यह यंत्र न केवल मंदिर की दिव्यता को बढ़ाएगा, बल्कि आने वाले दशकों तक अयोध्या के सुरक्षा कवच के रूप में भी कार्य करेगा।
क्या है श्री राम यंत्र?
यंत्र शास्त्र के अनुसार, यंत्र एक 'ऊर्जा का स्वरूप' (Energy Form) होता है। श्री राम यंत्र भगवान विष्णु के सातवें अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की शक्तियों का ज्यामितीय निरूपण है। इसमें विशेष प्रकार के त्रिकोण, वृत्त और कमल की पंखुड़ियों का उपयोग किया जाता है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा को एक बिंदु पर केंद्रित करते हैं।
यंत्र का ज्योतिषीय रहस्य और महत्व
ज्योतिष शास्त्र और वास्तु विज्ञान के अनुसार, इस यंत्र की स्थापना के पीछे कई गहरे कारण हैं:
1. ग्रहों के दोषों का निवारण: भगवान राम का जन्म कर्क लग्न और पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था। उनके यंत्र की स्थापना से सूर्य (राजसत्ता), चंद्रमा (मन की शांति) और बृहस्पति (ज्ञान) के शुभ प्रभाव बढ़ते हैं। यह यंत्र दर्शनार्थियों के जीवन से मानसिक अशांति और पितृ दोष जैसे कष्टों को दूर करने में सहायक माना जाता है।
2. नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा: यंत्र की संरचना में 'रं' बीज मंत्र की शक्ति समाहित होती है, जो अग्नि तत्व का प्रतीक है। ज्योतिषियों का मानना है कि यह यंत्र अयोध्या और संपूर्ण राष्ट्र को नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी नजर से बचाने के लिए एक 'सुरक्षा घेरे' की तरह काम करेगा।
3. वास्तु पुरुष की संतुष्टि: किसी भी बड़े मंदिर परिसर में यंत्र की स्थापना भूमि के वास्तु दोषों को समाप्त करती है। श्री राम यंत्र मंदिर की नींव और शिखर के बीच ऊर्जा का संतुलन बनाए रखेगा, जिससे वहां आने वाले श्रद्धालुओं को तत्काल शांति का अनुभव होगा।
यंत्र की बनावट और विशेषताएँ
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धातु: इसे पंचधातु (सोना, चांदी, तांबा, पीतल और लोहा) या अष्टधातु से निर्मित किया जाता है, जो नौ ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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बीज मंत्र: इस पर 'रामाय नमः' और 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं रामचंद्राय श्रीं' जैसे शक्तिशाली मंत्र उत्कीर्ण होते हैं।
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ज्यामिति: इसमें नौ कोण होते हैं जो नवधा भक्ति और नौ ग्रहों के संतुलन को दर्शाते हैं।

भक्तों के लिए इसका क्या अर्थ है?
कहा जाता है कि यंत्र के दर्शन मात्र से व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जो भक्त इस यंत्र के समक्ष बैठकर राम नाम का जाप करेंगे, उन्हें शनि की साढ़ेसाती और राहु-केतु के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिल सकती है।
अयोध्या में श्री राम यंत्र की स्थापना धर्म और विज्ञान के मिलन का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारी प्राचीन यंत्र-मंत्र विद्या से परिचित कराएगा और भारत की आध्यात्मिक शक्ति को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देगा।
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