महिला आरक्षण- 3 संशोधन बिल लोकसभा में पेश !

महिला आरक्षण बिल पर अखिलेश यादव ने मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग कोटे की मांग की, जिस पर अमित शाह ने पलटवार करते हुए उन्हें अपनी पार्टी के सभी टिकट महिलाओं को देने की चुनौती दी।

महिला आरक्षण- 3 संशोधन बिल लोकसभा में पेश !

लोकसभा में महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को प्रभावी बनाने के लिए पेश किए गए 3 संशोधन विधेयकों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने जहां इसमें "कोटा के भीतर कोटा" की मांग दोहराई, वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने उन पर पलटवार किया।

अखिलेश यादव की मांग: "मुस्लिम और पिछड़ी महिलाओं को मिले हक"

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सदन में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन उन्होंने बिल के वर्तमान स्वरूप पर सवाल उठाए:

  • मुस्लिम आरक्षण: अखिलेश यादव ने मांग की कि आरक्षण के दायरे में मुस्लिम महिलाओं को भी शामिल किया जाए। उनका तर्क है कि बिना इसके "आधी आबादी" का प्रतिनिधित्व अधूरा है।

  • जातिगत जनगणना: उन्होंने मांग की कि आरक्षण लागू करने से पहले सरकार जातिगत जनगणना कराए ताकि पिछड़ी और दलित महिलाओं को उनकी आबादी के अनुपात में हक मिल सके।

  • जल्दबाजी पर सवाल: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना तैयारी और परिसीमन के इस बिल को जल्दबाजी में ला रही है।


अमित शाह का पलटवार: "आप उन्हें सारे टिकट दे दीजिए"

अखिलेश यादव के मुस्लिम आरक्षण के सुझाव पर गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाया:

  • संवैधानिक मर्यादा: शाह ने कहा कि भारत के संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है और ऐसा करना असंवैधानिक होगा।

  • तीखा तंज: उन्होंने अखिलेश यादव से सीधे लहजे में कहा—

"अगर आपको मुस्लिम महिलाओं की इतनी ही चिंता है, तो आपकी पार्टी उन्हें अपने कोटे से सारी सीटें (टिकट) क्यों नहीं दे देती? हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है।"

  • एकजुटता की अपील: शाह ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और भागीदारी के इस ऐतिहासिक कदम पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को एकमत होना चाहिए।


संशोधन बिल की मुख्य बातें (2026)

लोकसभा में पेश किए गए इन विधेयकों में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं:

  1. सीटों की संख्या में वृद्धि: लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसमें से 33% यानी लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

  2. 15 साल की अवधि: यह आरक्षण फिलहाल 15 वर्षों (2029, 2034 और 2039 के चुनाव) के लिए लागू होगा, जिसके बाद संसद इसकी समीक्षा करेगी।

  3. रोटेशन प्रणाली: आरक्षित सीटों को हर चुनाव के बाद रोटेशन के आधार पर बदला जाएगा ताकि हर क्षेत्र की महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका मिले।

  4. SC/ST कोटा: कुल 33% आरक्षण के भीतर ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षण शामिल होगा।

विपक्ष का मुख्य विरोध परिसीमन (Delimitation) और जनगणना की शर्तों को लेकर है, क्योंकि इनके बिना यह आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू होना मुश्किल नजर आता है।