महादेव के द्वार पहुंचे PM मोदी: 75 साल का गौरवशाली उत्सव !
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर 11 पवित्र तीर्थों के जल से भव्य कुंभाभिषेक किया। इस ऐतिहासिक अमृत महोत्सव के दौरान भव्य रोड शो और वायुसेना के जाबांज सूर्यकिरण टीम के एयर शो ने उत्सव में चार चांद लगा दिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 मई, 2026 को गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' (या सोमनाथ अमृत पर्व) में शिरकत की। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में भी भव्य तरीके से मनाया गया।
1. भव्य रोड शो और स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ हेलीपैड से लेकर वीर हमीरजी गोहिल सर्कल तक करीब 1 किलोमीटर लंबा भव्य रोड शो किया।
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रास्ते भर लोगों ने 'हर-हर महादेव' के जयघोष और फूलों की वर्षा के साथ उनका स्वागत किया।
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सड़कों को भगवा झंडों, स्वागत द्वारों और पारंपरिक झांकियों से सजाया गया था।
2. 11 तीर्थों के जल से कुंभाभिषेक
प्रधानमंत्री ने मंदिर के शिखर पर कुंभाभिषेक किया, जो इस महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान था।
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पवित्र जल: इस अभिषेक के लिए देश के 11 प्रमुख तीर्थों और पवित्र नदियों का जल लाया गया था।
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ध्वज पूजा: उन्होंने मंदिर पर नई ध्वजा चढ़ाई और विधि-विधान से महापूजा और जलाभिषेक संपन्न किया।

3. सूर्यकिरण टीम का एयर शो
आध्यात्मिक उत्सव में राष्ट्रवाद का रंग भरते हुए भारतीय वायुसेना की 'सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम' (SKAT) ने मंदिर के ऊपर हैरतअंगेज एयर शो किया।
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त्रिरंगा आसमान में: लाल और सफेद रंग के Hawk Mk-132 विमानों ने आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग का धुआं छोड़ते हुए तिरंगा बनाया।
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पुष्प वर्षा: वायुसेना के चेतक हेलीकॉप्टर ने मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं पर फूलों की बारिश की।
4. अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियाँ
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स्मारक सिक्का और डाक टिकट: इस अवसर पर पीएम ने 75 रुपये का स्मारक सिक्का और एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया।
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प्रदर्शनी: मंदिर परिसर में "विनाश से विकास तक" की यात्रा को दर्शाने वाली एक डिजिटल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को विशेष रूप से दिखाया गया है।
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जनसभा: पूजा के बाद पीएम ने सद्भावना मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने सोमनाथ को भारत की अटूट आस्था और पुनरुत्थान का प्रतीक बताया।
ऐतिहासिक संदर्भ: 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में 'प्राण-प्रतिष्ठा' की थी। आज ठीक 75 साल बाद उसी गौरवशाली क्षण को 'अमृत महोत्सव' के रूप में मनाया गया।
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