Chicken Neck:भारत की सीक्रेट सुरंग,युद्ध हुआ तो क्या होगा फायदा ?
चिकन नेक में 40 किमी लंबी अंडरग्राउंड रेल सुरंग बनाकर भारत पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक 'सुरक्षित कवच' तैयार कर रहा है। यह सुरंग युद्ध की स्थिति में दुश्मन की नजरों और मिसाइलों से बचकर सैनिकों और रसद की गुप्त आवाजाही सुनिश्चित करेगी।
चिकन नेक में 'पाताली' कवच: भारत क्यों बना रहा है सुरंग और इसके रणनीतिक फायदे?
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे भौगोलिक बनावट के कारण 'चिकन नेक' कहा जाता है, भारत की सुरक्षा के लिए सबसे संवेदनशील इलाका है। अब इस इलाके को अभेद्य बनाने के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 40 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेलवे सुरंग बनाने की परियोजना को मंजूरी दी है।
क्या है चिकन नेक की संवेदनशीलता?
चिकन नेक भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर (Northeast) के 8 राज्यों से जोड़ने वाला एकमात्र संकरा रास्ता है। इसकी चौड़ाई कहीं-कहीं मात्र 20 से 22 किलोमीटर ही है। इसके एक तरफ नेपाल है, दूसरी तरफ बांग्लादेश और उत्तर में चीन की चुम्बी घाटी। युद्ध की स्थिति में अगर कोई दुश्मन इस संकरे रास्ते को ब्लॉक कर दे, तो भारत का संपर्क अपने पूर्वोत्तर राज्यों से पूरी तरह कट सकता है।
सुरंग बनाने के 5 बड़े कारण और फायदे
1. हवाई और मिसाइल हमलों से सुरक्षा (Bomb-Proof Protection)
जमीन के ऊपर बनी रेलवे लाइनें और सड़कें दुश्मन के रडार और सैटेलाइट की नजर में होती हैं। इन्हें ड्रोन, मिसाइल या हवाई हमले से आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। जमीन के 20-25 मीटर नीचे होने के कारण यह सुरंग एक 'अभेद्य कवच' की तरह काम करेगी, जिसे नष्ट करना लगभग असंभव होगा।
2. सैनिकों और भारी हथियारों की गुप्त आवाजाही
युद्ध की स्थिति में भारतीय सेना को टैंक, मिसाइल सिस्टम और भारी गोला-बारूद पूर्वोत्तर सीमा तक पहुँचाना होता है। यह अंडरग्राउंड रास्ता सेना को अदृश्य आवाजाही (Non-visible movement) की ताकत देगा। दुश्मन को पता भी नहीं चलेगा और भारतीय फौज सीमा पर तैनात हो जाएगी।
3. प्राकृतिक आपदाओं का असर नहीं (All-Weather Connectivity)
सिलीगुड़ी का इलाका भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन (Landslides) के लिए जाना जाता है। अक्सर प्राकृतिक आपदाओं के कारण ऊपर का संपर्क टूट जाता है। अंडरग्राउंड सुरंग मौसम के प्रभाव से मुक्त रहेगी, जिससे 365 दिन निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
4. चीन की 'चुम्बी घाटी' की चुनौती का जवाब
चीन ने डोकलाम के पास चुम्बी घाटी में अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ाई है, जहाँ से वह चिकन नेक पर नजर रखता है। यह सुरंग बनाकर भारत ने चीन के उस 'चोक पॉइंट' (Choke Point) खतरे को खत्म कर दिया है, जिसे वह भारत की कमजोरी मानता था।
5. रसद और नागरिक आपूर्ति की सुरक्षा
पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान इसी कॉरिडोर से जाते हैं। सुरंग होने से संकट के समय भी आम नागरिकों तक सप्लाई चेन बनी रहेगी और क्षेत्र में महंगाई या कमी जैसी स्थिति पैदा नहीं होगी।
प्रोजेक्ट की मुख्य बातें
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लंबाई: लगभग 35.76 से 40 किलोमीटर।
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रूट: यह पश्चिम बंगाल के तिनमाइल हाट, रांगापानी और बागडोगरा को जोड़ेगी।
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तकनीक: इसका निर्माण अत्याधुनिक TBM (Tunnel Boring Machine) तकनीक से किया जाएगा।
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महत्व: यह बागडोगरा एयरफोर्स स्टेशन और बेनगुडी आर्मी बेस के पास से गुजरेगी, जिससे वायुसेना और थल सेना का तालमेल बेहतर होगा।

यह सुरंग केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और राष्ट्रीय सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा है। इसके बन जाने के बाद 'चिकन नेक' अब भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि चीन और अन्य विरोधियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगा।
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