अब 'सलीम-सुरेश' का खेल खत्म ! विधानसभा में गरजे हर्ष संघवी !

गुजरात सरकार ने 'विवाह पंजीकरण अधिनियम-2006' में बड़े बदलावों का प्रस्ताव पेश किया है, जिसका उद्देश्य पहचान छिपाकर होने वाली धोखाधड़ी और 'लव जिहाद' जैसी साजिशों को रोकना है।

अब 'सलीम-सुरेश' का खेल खत्म ! विधानसभा में गरजे हर्ष संघवी !

लव जिहाद और छल-कपट पर गुजरात सरकार का 'सुरक्षा चक्र': हर्ष संघवी ने विधानसभा में विवाह पंजीकरण नियमों में बड़े बदलाव का किया ऐलान

गांधीनगर: गुजरात विधानसभा में आज एक अत्यंत संवेदनशील और सामाजिक महत्व के मुद्दे पर ऐतिहासिक घोषणा की गई। राज्य के गृह राज्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 'गुजरात विवाह पंजीकरण अधिनियम-2006' के नियमों में व्यापक सुधार पेश किए। सरकार का यह कदम प्रेम विवाह के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी को रोकने और विवाह प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है।

9 महीने का संघर्ष और माता-पिता की वेदना का अंत

गुजरात में पिछले काफी समय से पाટીદાર, क्षत्रिय और ठाकोर समाज सहित कई सामाजिक संगठन मांग कर रहे थे कि प्रेम विवाह के पंजीकरण में माता-पिता के हस्ताक्षर अनिवार्य किए जाएं। हर्ष संघवी ने सदन में कहा कि सरकार ने उन लाखों माता-पिता की पीड़ा को गंभीरता से लिया है जिनकी बेटियों को असामाजिक तत्व निशाना बनाते हैं।


नियम 44 के तहत नए सुधार: मुख्य बातें

विधानसभा में पेश किए गए इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य "भगोड़े विवाह" (Runaway Marriages) की आड़ में होने वाले अपराधों को रोकना है:

  • जनता से मांगे सुझाव: नियम 44 के तहत नए नियमों का मसौदा तैयार है। अगले 30 दिनों तक जनता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की वेबसाइट पर अपने सुझाव या आपत्तियां दर्ज करा सकती है।

  • निगरानी समिति का गठन: प्राप्त सुझावों और आपत्तियों को सुनने और समीक्षा करने के लिए एक विशेष कमेटी बनाई गई है।

  • स्थानीय पंजीकरण की मांग: सामाजिक संगठनों की मांग है कि विवाह का पंजीकरण केवल संबंधित स्थानीय क्षेत्र (गाँव या तालुका) में ही होना चाहिए, जिसे सरकार गंभीरता से विचार रही है।


"सलीम अगर सुरेश बनकर आएगा, तो खैर नहीं"

सदन को संबोधित करते हुए हर्ष संघवी का तेवर काफी सख्त था। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा:

"प्रेम दुनिया का सबसे पवित्र रिश्ता है, लेकिन अगर कोई छल-कपट से इसे बदनाम करेगा, तो सरकार उसे छोड़ेगी नहीं। सीता माता का हरण करने के लिए रावण साधु के वेश में आया था। ठीक वैसे ही, अगर कोई 'सलीम' बनकर 'सुरेश' के नाम से हमारी भोली बेटियों की भावनाओं से खेलेगा, तो उसका वो हाल करेंगे कि वह जीवन में कभी किसी बेटी की तरफ आंख उठाकर नहीं देख पाएगा।"

भ्रष्ट अधिकारियों को सीधी चेतावनी

मंत्री ने केवल अपराधियों को ही नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे उन भ्रष्ट अधिकारियों को भी चेतावनी दी जो फर्जी कागजात या नियमों की अनदेखी कर अमानवीय तत्वों का साथ देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त करने के साथ-साथ जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।


सामाजिक ताने-बाने को बचाने की कोशिश

यह सुधार केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि गुजरात के सामाजिक ढांचे को सुरक्षित रखने का एक प्रयास है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 30 दिनों के सुझाव काल के बाद सरकार 'माता-पिता की सहमति' वाले क्लॉज को किस रूप में अंतिम कानून का हिस्सा बनाती है।