होलिका दहन 2026: भद्रा के कारण बदला समय, भूलकर भी इस समय न जलाएं होली !
आज शाम 5:45 बजे से भद्रा शुरू होने के कारण होलिका दहन रात 11:35 बजे के बाद करना शुभ रहेगा। भद्रा काल में दहन वर्जित होने के कारण ज्योतिषियों ने देर रात के मुहूर्त को ही सर्वश्रेष्ठ बताया है।
आज शाम 5:45 बजे से भद्रा का साया: जानें होलिका दहन का सबसे शुभ मुहूर्त और नियम
रंगों के त्योहार होली से ठीक एक दिन पहले होलिका दहन की परंपरा निभाई जाती है। इस साल होलिका दहन पर 'भद्रा' का साया रहने के कारण शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों में काफी उलझन है। ज्योतिष गणना के अनुसार, आज शाम 5:45 बजे से भद्रा शुरू हो रही है, जो देर रात तक चलेगी। ऐसे में भद्रा काल के दौरान होलिका दहन वर्जित माना गया है।
आइए जानते हैं कि शास्त्र सम्मत सही मुहूर्त क्या है और भद्रा में दहन क्यों नहीं करना चाहिए।
1. क्या है भद्रा का समय?
आज यानी फाल्गुन पूर्णिमा को भद्रा का प्रारंभ शाम को हो रहा है:
-
भद्रा शुरू: आज शाम 5:45 PM से।
-
भद्रा समाप्त: रात 11:35 PM पर (अनुमानित)।
शास्त्रों के अनुसार, 'भद्रायां द्वे न कर्त्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा'—अर्थात भद्रा काल में रक्षाबंधन (श्रावणी) और होलिका दहन (फाल्गुनी) नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से अनिष्ट होने की आशंका रहती है।
भद्रा में क्यों नहीं करते होलिका दहन?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन हैं। उनका स्वभाव कठोर माना गया है। कहा जाता है कि भद्रा काल में किया गया कोई भी शुभ कार्य सफल नहीं होता। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, इसलिए इसे शुद्ध और भद्रा मुक्त काल में ही किया जाता है।
होलिका दहन की सरल पूजन विधि
-
पूजन के समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
-
होलिका के चारों ओर सात बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेटें।
-
गोबर के उपले, अनाज (गेहूं की बालियां), अक्षत, फूल और जल अर्पित करें।
-
अंत में प्रहलाद का स्मरण करते हुए अग्नि प्रज्वलित करें।
भले ही भद्रा शाम 5:45 बजे से लग रही है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। भक्ति और श्रद्धा के साथ भद्रा समाप्त होने का इंतजार करें और शुभ मुहूर्त में ही होलिका दहन करें ताकि आपके जीवन में सुख और समृद्धि का वास हो।
Matrimonial

BRG News 


