वानखेड़े का मैदान और इंग्लैंड का पुराना नाता ! क्या टीम इंडिया 2016 के इतिहास को दोहराने से रोक पाएगी ?
मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम ऐतिहासिक रूप से भारतीय टीम से ज्यादा इंग्लैंड के लिए भाग्यशाली रहा है, जहाँ अंग्रेजों ने कई बार टीम इंडिया को चौंकाया है।
वानखेड़े में फिर से 2016 रिपीट होगा? रिकॉर्ड्स गवाह हैं—यह मैदान भारत से ज्यादा इंग्लैंड के लिए लकी है!
क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम की लाल मिट्टी एक बार फिर गवाह बनने वाली है भारत और इंग्लैंड के बीच एक ऐतिहासिक महासंग्राम की। लेकिन मैच शुरू होने से पहले ही आंकड़ों और इतिहास ने भारतीय फैंस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सवाल उठ रहा है—क्या वानखेड़े में फिर से साल 2016 वाला मंजर दिखेगा? या टीम इंडिया इस बार इतिहास को पलटने में कामयाब होगी?
वानखेड़े और इंग्लैंड: एक डराने वाला इतिहास
कहने को तो यह भारत का घरेलू मैदान है, लेकिन इतिहास के पन्ने पलटें तो वानखेड़े में इंग्लैंड का पलड़ा हमेशा भारी रहा है। 2011 वर्ल्ड कप की जीत को छोड़ दें, तो टेस्ट और कई अहम मौकों पर इंग्लैंड ने यहाँ भारतीय शेरों को उनके ही मांद में धूल चटाई है।
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2016 का वो जख्म: साल 2016 का टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल कोई नहीं भूल सकता। वेस्टइंडीज ने इसी मैदान पर भारत को हराकर करोड़ों दिल तोड़े थे, लेकिन उसी टूर्नामेंट में इंग्लैंड ने इसी पिच पर जिस तरह का आक्रामक खेल दिखाया था, वह आज भी डराता है।
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स्पिन के जाल में खुद फंसा भारत: वानखेड़े की पिच पर टर्न की उम्मीद में भारत ने कई बार इंग्लैंड को चुनौती दी, लेकिन केविन पीटरसन (2012) और ग्रीम स्वान जैसे खिलाड़ियों ने इसी मैदान पर भारत के 'स्पिन चक्रव्यूह' को उन्हीं पर भारी कर दिया था।
मैदान भारत का, किस्मत इंग्लैंड की?
वानखेड़े स्टेडियम की बाउंड्री छोटी है और पिच से मिलने वाला उछाल इंग्लैंड के बल्लेबाजों को बहुत रास आता है।
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स्विंग और बाउंस: यहाँ की समुद्री हवाएं शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद देती हैं, जिसका फायदा एंडरसन से लेकर मार्क वुड जैसे इंग्लिश गेंदबाज बखूबी उठाना जानते हैं।
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हाई स्कोरिंग चेज: इंग्लैंड की 'बैजबॉल' (Bazball) स्टाइल वाली बल्लेबाजी के लिए वानखेड़े की तेज आउटफील्ड और छोटी बाउंड्री किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
क्या टीम इंडिया करेगी हिसाब बराबर?
भले ही रिकॉर्ड्स इंग्लैंड के पक्ष में दिख रहे हों, लेकिन मौजूदा भारतीय टीम फॉर्म में है। रोहित शर्मा की कप्तानी और जसप्रीत बुमराह की धारदार गेंदबाजी इस 'इंग्लिश लक' को तोड़ने का माद्दा रखती है। वानखेड़े की लाल मिट्टी पर अगर भारतीय स्पिनर्स ने अपनी पकड़ बना ली, तो इंग्लैंड के लिए यहाँ टिकना मुश्किल हो जाएगा।
2016 में इंग्लैंड ने इस मैदान पर जो रफ़्तार पकड़ी थी, क्या वह 2026 में भी जारी रहेगी? या वानखेड़े का क्राउड इस बार 'इंडिया-इंडिया' के नारों से इंग्लैंड के पैर उखाड़ देगा? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि मुकाबला कांटे का होगा।
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