PM मोदी का आज जन्मदिन: चाय की केतली से 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास तक का सफर...
जब नीयत साफ और इरादे फौलादी हों, तो एक छोटा सा कस्बा भी पूरे राष्ट्र का नेतृत्व कर सकता है। जन्मदिन की बधाई, पीएम मोदी !
17 सितंबर और नरेंद्र मोदी: वडनगर की पटरियों से सत्ता के शीर्ष तक का सफर
17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के एक छोटे से कस्बे वडनगर में जन्मे नरेंद्र दामोदरदास मोदी का सफर भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित अध्यायों में गिना जाता है। हर साल उनके जन्मदिन के मौके पर देश उनके नीतिगत फैसलों के साथ-साथ उनके जीवन से जुड़ी उन ऐतिहासिक जगहों और अनसुने संस्मरणों को भी याद करता है, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया।
वे ऐतिहासिक पड़ाव जिन्होंने गढ़ा नरेंद्र मोदी का जीवन
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वडनगर रेलवे स्टेशन (गुजरात): एक साधारण परिवार में जन्मे बालक नरेंद्र के दिन की शुरुआत अक्सर पिता की चाय की दुकान पर हाथ बंटाने से होती थी। वडनगर का यह रेलवे प्लेटफॉर्म आज भी उनके संघर्षशील बचपन का प्रत्यक्ष गवाह है।

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शर्मिष्ठा झील (वडनगर): स्थानीय लोककथाओं और उनके सहपाठियों के किस्सों में शर्मिष्ठा झील का जिक्र हमेशा आता है। बचपन में इसी झील से मगरमच्छ के बच्चे को पकड़कर घर लाने और फिर मां के समझाने पर वापस छोड़ने का प्रसंग उनके निडर स्वभाव की शुरुआत माना जाता है।
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बेलूर मठ और रामकृष्ण मिशन (पश्चिम बंगाल): किशोरावस्था में संन्यास और आध्यात्म की खोज उन्हें पश्चिम बंगाल ले गई। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होकर वे बेलूर मठ पहुंचे थे, जहां संतों ने उन्हें जनसेवा और राष्ट्र निर्माण का मार्ग चुनने की प्रेरणा दी।
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हेडगेवार भवन (अहमदाबाद): 1970 के दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्णकालिक प्रचारक बनने के बाद अहमदाबाद का यह केंद्र उनके संगठन कौशल, अनुशासन और सादगी भरे जीवन की प्रयोगशाला बना।
संघर्ष से लेकर 7 लोक कल्याण मार्ग तक
2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभालने से लेकर 2014 और उसके बाद लगातार देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना, भारतीय लोकतंत्र की समावेशी ताकत को दर्शाता है। 17 सितंबर का दिन केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए एक नज़ीर भी बन जाता है जो अभावों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं।
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