दिल्ली में बहुत बड़ा हादसा , सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत गिरी...

ताश के पत्तों की तरह ढह गई 5 मंजिला इमारत, मलबे में दबी कई जिंदगियां। आखिर कब रुकेगा लापरवाही का यह खूनी खेल?

दिल्ली में बहुत बड़ा हादसा , सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत गिरी...

दिल्ली में 5 मंजिला इमारत जमींदोज: 3 की मौत, मलबे में दबे दर्जनों लोग...

देश की राजधानी एक बार फिर एक बड़े हादसे की गवाह बनी है। एक घनी आबादी वाले इलाके में अचानक 5 मंजिला रिहायशी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मलबे के नीचे 40 से 50 लोगों के दबे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। मौके पर एनडीआरएफ (NDRF), दमकल विभाग और दिल्ली पुलिस की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।

घटनास्थल पर अफरातफरी और चीख-पुकार

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतना अचानक हुआ कि लोगों को बाहर भागने तक का मौका नहीं मिला। जोरदार धमाके जैसी आवाज के साथ पूरी इमारत धूल के गुबार में तब्दील हो गई। आसपास के लोगों ने फौरन पुलिस को सूचना दी और खुद भी बचाव कार्य में जुट गए। संकरी गलियां होने के कारण भारी क्रेन और रेस्क्यू मशीनों को मौके तक पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मलबे के अंदर फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की कोशिशें जारी हैं।

एक साल में 6 बड़े हादसे, 35 से ज्यादा जानें गईं

यह कोई पहली घटना नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी में लगातार हो रहे ऐसे हादसों ने नगर निगम (MCD) और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालिया प्रमुख हादसे प्रभावित इलाके मुख्य कारण
सत्य निकेतन / दक्षिण दिल्ली छात्र बाहुल्य क्षेत्र बेसमेंट खुदाई व अवैध अतिरिक्त मंजिलें
पुरानी दिल्ली (चांदनी महल क्षेत्र) संकरी गलियां 50-60 साल पुरानी जर्जर इमारतें
उत्तरी-पूर्वी दिल्ली (मुस्तफाबाद/सीलमपुर) घनी आबादी घटिया निर्माण सामग्री और अनधिकृत विस्तार
बवाना व नरेला इंडस्ट्रियल बेल्ट रिहायशी/औद्योगिक क्लस्टर बिना स्ट्रक्चरल सेफ्टी लोड बढ़ाना

आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक साल के अंदर दिल्ली-एनसीआर में इमारत गिरने के 6 बड़े हादसे सामने आ चुके हैं, जिनमें अब तक 35 से अधिक मासूम लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

हादसों की जड़: आखिर क्यों ढह रही हैं इमारतें?

  • अवैध निर्माण और कमजोर नींव: 50-60 गज के छोटे प्लॉटों पर बिना पिलर और कमजोर नींव के चार-पांच मंजिलें खड़ी कर दी जाती हैं।

  • बेसमेंट की अनियंत्रित खुदाई: नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट की अवैध खुदाई की जाती है, जिससे आसपास की पुरानी इमारतों की नींव हिल जाती है।

  • भ्रष्टाचार और अनदेखी: नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के संज्ञान में होने के बावजूद अवैध निर्माणों पर समय रहते बुलडोजर या सीलिंग की कार्रवाई नहीं होती।

  • स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट का अभाव: पुरानी और जर्जर हो चुकी इमारतों का कोई नियमित सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया जाता।

कड़े कदम उठाने का वक्त

हर हादसे के बाद जांच कमेटियां गठित की जाती हैं, मुआवजे का ऐलान होता है और कुछ दिन बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। जब तक अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या जैसी सख्त धाराओं के तहत ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मासूम जिंदगियां यूं ही मलबे में दम तोड़ती रहेंगी।