दिल्ली में बहुत बड़ा हादसा , सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत गिरी...
ताश के पत्तों की तरह ढह गई 5 मंजिला इमारत, मलबे में दबी कई जिंदगियां। आखिर कब रुकेगा लापरवाही का यह खूनी खेल?
दिल्ली में 5 मंजिला इमारत जमींदोज: 3 की मौत, मलबे में दबे दर्जनों लोग...
देश की राजधानी एक बार फिर एक बड़े हादसे की गवाह बनी है। एक घनी आबादी वाले इलाके में अचानक 5 मंजिला रिहायशी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
घटनास्थल पर अफरातफरी और चीख-पुकार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतना अचानक हुआ कि लोगों को बाहर भागने तक का मौका नहीं मिला।
एक साल में 6 बड़े हादसे, 35 से ज्यादा जानें गईं
यह कोई पहली घटना नहीं है।
| हालिया प्रमुख हादसे | प्रभावित इलाके | मुख्य कारण |
| सत्य निकेतन / दक्षिण दिल्ली | छात्र बाहुल्य क्षेत्र | बेसमेंट खुदाई व अवैध अतिरिक्त मंजिलें |
| पुरानी दिल्ली (चांदनी महल क्षेत्र) | संकरी गलियां | 50-60 साल पुरानी जर्जर इमारतें |
| उत्तरी-पूर्वी दिल्ली (मुस्तफाबाद/सीलमपुर) | घनी आबादी | घटिया निर्माण सामग्री और अनधिकृत विस्तार |
| बवाना व नरेला इंडस्ट्रियल बेल्ट | रिहायशी/औद्योगिक क्लस्टर | बिना स्ट्रक्चरल सेफ्टी लोड बढ़ाना |
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक साल के अंदर दिल्ली-एनसीआर में इमारत गिरने के 6 बड़े हादसे सामने आ चुके हैं, जिनमें अब तक 35 से अधिक मासूम लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
हादसों की जड़: आखिर क्यों ढह रही हैं इमारतें?
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अवैध निर्माण और कमजोर नींव: 50-60 गज के छोटे प्लॉटों पर बिना पिलर और कमजोर नींव के चार-पांच मंजिलें खड़ी कर दी जाती हैं।
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बेसमेंट की अनियंत्रित खुदाई:
नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट की अवैध खुदाई की जाती है, जिससे आसपास की पुरानी इमारतों की नींव हिल जाती है। -
भ्रष्टाचार और अनदेखी: नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के संज्ञान में होने के बावजूद अवैध निर्माणों पर समय रहते बुलडोजर या सीलिंग की कार्रवाई नहीं होती।
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स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट का अभाव: पुरानी और जर्जर हो चुकी इमारतों का कोई नियमित सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया जाता।
कड़े कदम उठाने का वक्त
हर हादसे के बाद जांच कमेटियां गठित की जाती हैं, मुआवजे का ऐलान होता है और कुछ दिन बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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