SEBI ने बजट से पहले सरकार को दिए 2 बड़े प्रस्ताव !

बजट से पहले मार्केट रेगुलेटर SEBI ने वित्त मंत्रालय को LTCG टैक्स में बदलाव के लिए 2 बड़े प्रस्ताव भेजे हैं।

SEBI ने बजट से पहले सरकार को दिए 2 बड़े प्रस्ताव !

शेयर बाजार निवेशकों को बड़ी राहत की तैयारी: SEBI ने LTCG टैक्स पर सरकार को भेजे 2 बड़े प्रस्ताव !

भारतीय शेयर बाजार में लगातार जारी विदेशी पूंजी की निकासी और सुस्त माहौल के बीच मार्केट रेगुलेटर SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने निवेशकों को बूस्ट देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सूत्रों के अनुसार, सेबी ने केंद्र सरकार को आगामी बजट से पहले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स व्यवस्था में बड़े बदलावों की सिफारिश की है।

अगर वित्त मंत्रालय इन सिफारिशों पर मुहर लगाता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) के साथ-साथ घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी बड़ा फायदा मिलेगा।

SEBI ने सरकार को दिए ये 2 अहम प्रस्ताव

सेबी की ओर से वित्त मंत्रालय को भेजी गई प्री-बजट सिफारिशों में मुख्य रूप से दो बड़े सुझाव शामिल हैं:

1. विदेशी निवेशकों (FPIs) के लिए इक्विटी पर LTCG टैक्स खत्म करना

  • प्रस्ताव: सेबी ने सिफारिश की है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors) के लिए भारतीय इक्विटी पर लगने वाले 12.5% LTCG टैक्स को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

  • उद्देश्य: चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे प्रतिस्पर्धी बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार को वैश्विक स्तर पर अधिक आकर्षक बनाना, ताकि विदेशी पूंजी की भारी निकासी रोकी जा सके।

2. म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए 'स्विचिंग' पर टैक्स छूट (Reinvestment Relief)

  • प्रस्ताव: घरेलू खुदरा निवेशकों के लिए सेबी ने सुझाव दिया है कि यदि कोई निवेशक एक साल से अधिक पुरानी म्यूचुअल फंड होल्डिंग को बेचकर (Switch) किसी अन्य फंड या स्कीम में दोबारा निवेश (Reinvest) करता है, तो उसे उस ट्रांजेक्शन पर LTCG टैक्स से छूट मिलनी चाहिए।

  • उद्देश्य: वर्तमान में किसी एक स्कीम से दूसरी स्कीम में पोर्टफोलियो रीबैलेंस करने पर इसे 'रिडेम्पशन' मानकर कैपिटल गेन टैक्स लग जाता है। इस छूट से वेल्थ क्रिएशन और पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग बिना किसी टैक्स पेनाल्टी के संभव हो सकेगी।

क्यों पड़ी इन प्रस्तावों की जरूरत?

  1. FPIs की रिकॉर्ड बिकवाली: साल 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से ₹3 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी निकाली है। इस भारी आउटफ्लो से घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स और रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।

  2. वैश्विक प्रतिस्पर्धा: कई वैश्विक बाजारों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में विदेशी निवेशकों के लिए कैपिटल गेन्स टैक्स या तो शून्य है या बेहद नाममात्र है। भारतीय टैक्स नियमों की जटिलता और 12.5% की दर के चलते विदेशी फंड दूसरे उभरते बाजारों का रुख कर रहे थे।

  3. घरेलू निवेशकों को रीबैलेंसिंग का हक: इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में सक्रिय खुदरा निवेशकों को पोर्टफोलियो बेहतर करने के दौरान बार-बार टैक्स लागत का सामना करना पड़ता है, जिसे आसान बनाने की मांग लंबे समय से हो रही थी।

मौजूदा टैक्स नियम क्या कहते हैं?

वर्तमान नियमों के तहत शेयर बाजार और इक्विटी म्यूचुअल फंड में:

  • LTCG टैक्स दर: 1 साल से अधिक समय तक होल्ड किए गए शेयरों या इक्विटी फंड्स पर 12.5% की दर से टैक्स लागू होता है।

  • सालाना छूट सीमा: वित्त वर्ष में कुल ₹1.25 लाख तक के लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता; इसके ऊपर के मुनाफे पर 12.5% देय होता है।

बजट से पहले या बजट में ऐलान संभव?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही संकेत दिए थे कि सरकार कैपिटल गेन्स टैक्स और सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) को लेकर निवेशकों और उद्योग जगत के फीडबैक पर गंभीरता से विचार कर रही है।

चूंकि टैक्स नियमों में संशोधन के लिए विधायी और बजटीय प्रक्रिया की आवश्यकता होती है, इसलिए इन प्रस्तावों पर अंतिम मुहर आगामी केंद्रीय बजट में लगने की पूरी संभावना है। यदि सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार कर लेती है, तो यह शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए हाल के वर्षों का सबसे बड़ा रिफॉर्म साबित हो सकता है।