अदालत ने 'नीले ड्रम हत्याकांड' को माना दुर्लभतम अपराध, सुनाई मौत की सजा !
कोर्ट का सबसे बड़ा फैसला: नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी!
सजा सुनते ही अदालत में गश खाकर रो पड़े मुस्कान और साहिल: 'नीले ड्रम हत्याकांड' में फांसी की सजा का ऐलान !
मेरठ के चर्चित और रूह कंपा देने वाले नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने अपना ऐतिहासिक और अंतिम फैसला सुनाते हुए दोषियों को मृत्युदंड दिया है। जैसे ही विशेष सत्र न्यायाधीश ने मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) करार देते हुए मुस्कान और साहिल दोनों को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई, कटघरे में खड़े दोनों दोषी बदहवास होकर रोने लगे और अदालत कक्ष में ही टूटकर गिर पड़े।
जिस निर्मम हत्याकांड ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था, उसमें कानून ने मिसाल कायम करते हुए सबसे कड़ी सजा मुकर्रर की है।
क्या था पूरा मामला?
इस वारदात की नींव अवैध प्रेम संबंध, धोखे और रास्ते से हटाने की गहरी साजिश पर टिकी थी। आरोपी महिला (मुस्कान) ने अपने प्रेमी (साहिल) के साथ मिलकर अपने ही पति की सुनियोजित तरीके से नृशंस हत्या की थी। साक्ष्य मिटाने और पहचान छुपाने के लिए शव के टुकड़े किए गए और उसे एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में नमक व केमिकल डालकर बंद कर दिया गया था। जब लावारिस पड़े ड्रम से असहनीय दुर्गंध फैली और पुलिस ने उसे खोला, तो अंदर का खौफनाक मंजर देखकर जांच अधिकारी भी दंग रह गए थे।
तारीख-दर-तारीख घटनाक्रम: पूरी टाइमलाइन
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गुमशुदगी और गुमराह करने का ड्रामा: मृतक के अचानक लापता होने पर परिजनों ने थाने में तहरीर दी। शुरुआती दौर में पत्नी मुस्कान पुलिस और परिजनों को यह कहकर गुमराह करती रही कि उसके पति बिना बताए कहीं चले गए हैं।
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लावारिस नीले ड्रम से खुलासा: वारदात के कुछ दिनों बाद सुनसान इलाके में रखे नीले ड्रम से आ रही बदबू पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। ड्रम खोलने पर मृतक का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। शिनाख्त होते ही जांच का दायरा घर तक पहुंच गया।
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कॉल डिटेल और फॉरेंसिक सुराग: पुलिस ने मुस्कान के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाले, जिससे साहिल के साथ उसकी लगातार लंबी बातचीत और घटना के दिन की लोकेशन का खुलासा हुआ। दोनों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई।
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इकबाल-ए-जुर्म और बरामदगी: पुलिसिया पूछताछ में दोनों टूट गए। उन्होंने कबूल किया कि पहले नशीला पदार्थ देकर गला घोंटा गया, फिर शव को ठिकाने लगाने के लिए बाजार से नीला ड्रम, आरी और केमिकल खरीदा गया था। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार और खरीद के बिल बरामद किए।
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स्पीडी ट्रायल और पुख्ता चार्जशीट: पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक डीएनए रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर ठोस चार्जशीट अदालत में दाखिल की।
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अदालत में अंतिम बहस: अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी कि यह केवल हत्या नहीं, बल्कि रिश्ते की गरिमा और समाज की आत्मा पर क्रूर हमला है। इसे पूर्व-नियोजित और बर्बर बताते हुए फांसी की मांग की गई।
अदालत का अंतिम निर्णय
अदालत ने पत्रावली पर मौजूद प्रत्यक्ष व वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद मुस्कान और साहिल दोनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 120B (आपराधिक षड्यंत्र) और 201 (साक्ष्य मिटाने) के तहत दोषी करार दिया।
अदालत ने अपने फैसले में निम्नलिखित आदेश पारित किए:
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फांसी की सजा (Death Penalty): हत्या की क्रूरता, योजनाबद्ध साजिश और शव के साथ की गई बर्बरता को देखते हुए अदालत ने इसे 'Rarest of Rare' (दुर्लभ से दुर्लभतम) मामला माना और दोनों दोषियों—मुस्कान और साहिल—को मौत की सजा (फांसी) सुनाई।
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साक्ष्य नष्ट करने पर कठोर कारावास: शव को ड्रम में बंद कर छिपाने के जुर्म में धारा 201 के तहत अतिरिक्त कठोर कारावास और अर्थदंड लगाया।
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अदालत कक्ष का मंजर: "फांसी पर लटकाया जाए" (To be hanged by the neck till dead) का आदेश सुनते ही दोनों दोषी चीख पड़े, हाथ जोड़कर रहम की भीख मांगने लगे और वहीं फर्श पर बैठकर फूट-फूट कर रोने लगे। हालांकि अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए किसी भी प्रकार की दया दिखाने से इनकार कर दिया।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
सजा का फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि वैवाहिक रिश्ते की आड़ में इस तरह का विश्वासघात और शव के टुकड़ों को ड्रम में भरकर नष्ट करने की मानसिकता समाज के लिए नासूर है। ऐसे अपराधियों के प्रति नरमी बरतना न्याय प्रणाली और पीड़ित परिवार के दर्द के साथ अन्याय होगा। ऐसे दरिंदगी भरे अपराधों का एकमात्र उचित दंड मृत्युदंड ही है।
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