गुजरात स्थापना दिवस:1 मई 1960:,क्या हुआ था उस दिन?
इंदुलाल याज्ञिक के नेतृत्व में 'महागुजरात आंदोलन' ने जन्म लिया और भाषाई आधार पर बॉम्बे स्टेट से अलग होकर एक नए समृद्ध राज्य 'गुजरात' का उदय हुआ।
आज 1 मई है, और संपूर्ण गुजरात के लिए यह एक गौरवशाली दिन है—गुजरात स्थापना दिवस। इसे 'गुजरात गौरव दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नक्शे पर दिखने वाला आज का गुजरात हमेशा से ऐसा नहीं था?
इसके पीछे संघर्ष, संकल्प और जन-आंदोलन की एक लंबी कहानी है। आइए जानते हैं गुजरात के गठन का इतिहास:
1. महागुजरात आंदोलन की शुरुआत
स्वतंत्रता के बाद, भारत के पश्चिमी भाग में 'बॉम्बे स्टेट' (बंबई राज्य) हुआ करता था। इस बड़े राज्य में दो मुख्य भाषा बोलने वाले लोग शामिल थे:
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गुजराती भाषी (आज का गुजरात)
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मराठी भाषी (आज का महाराष्ट्र)
जैसे-जैसे समय बीता, दोनों समुदायों के बीच अपनी भाषाई पहचान के आधार पर अलग राज्यों की मांग उठने लगी। 1956 में जब राज्य पुनर्गठन अधिनियम आया, तब भी इन्हें अलग नहीं किया गया, जिससे असंतोष और बढ़ गया। इसी असंतोष ने 'महागुजरात आंदोलन' को जन्म दिया।
2. इंदुलाल याज्ञिक का नेतृत्व
इस आंदोलन का चेहरा बने इंदुलाल याज्ञिक, जिन्हें प्यार से लोग 'इन्दु चाचा' कहते थे। उनके नेतृत्व में छात्रों और आम जनता ने एक सुर में अलग गुजरात की मांग की। साबरमती आश्रम से लेकर अहमदाबाद की सड़कों तक, हर जगह बस एक ही नारा था—'अलग गुजरात'।
3. संघर्ष और बलिदान
यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं रहा। अगस्त 1956 में अहमदाबाद में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग हुई, जिसमें कई युवा शहीद हुए। इस घटना ने आंदोलन की आग को पूरे प्रदेश में फैला दिया। अंततः, जनता के भारी दबाव और निरंतर संघर्ष के आगे केंद्र सरकार को झुकना पड़ा।
4. 1 मई 1960: एक नए राज्य का उदय
संसद में 'बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम, 1960' पारित हुआ। इसके तहत:
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1 मई 1960 को बॉम्बे राज्य को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया गया।
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मराठी भाषी क्षेत्र महाराष्ट्र बना।
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गुजराती भाषी क्षेत्र को गुजरात के रूप में नई पहचान मिली।
विशेष तथ्य: गुजरात का उद्घाटन साबरमती आश्रम में भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और संत रविशंकर महाराज के हाथों हुआ था। उन्होंने ही नए राज्य को अपना आशीर्वाद दिया था।
गुजरात: आज का स्वरूप
आज गुजरात भारत के सबसे विकसित और औद्योगिक रूप से समृद्ध राज्यों में से एक है। अमूल की श्वेत क्रांति हो, नमक का उत्पादन हो, या व्यापारिक कुशलता—गुजरात ने हर क्षेत्र में दुनिया में अपना लोहा मनवाया है।
गुजरात स्थापना दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ!
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