वेटिंग चार्ज और पेमेंट की उलझन—भारत टैक्सी का सच क्या ?

A promising start meets a harsh reality: The Bharat Taxi driver dispute explained.

वेटिंग चार्ज और पेमेंट की उलझन—भारत टैक्सी का सच क्या ?

भारत टैक्सी (Bharat Taxi) ऐप, जिसे ओला और उबर के विकल्प के तौर पर एक 'ड्राइवर-मालक' (Cooperative) मॉडल के साथ लॉन्च किया गया था, शुरुआती दिनों में ही विवादों और ड्राइवरों की नाराजगी का सामना कर रहा है।

ड्राइवरों की नाराजगी और इस सपने के सामने खड़ी चुनौतियों के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. कम कमाई और किराए का मुद्दा

पुराना किराया ढांचा: ड्राइवरों का आरोप है कि ऐप पर किराया अभी भी पुराने मानकों (जब CNG ₹50 थी) के आधार पर तय किया जा रहा है, जबकि वर्तमान में ईंधन और मेंटेनेंस का खर्च काफी बढ़ गया है।

कमाई में गिरावट: कुछ ड्राइवरों ने शिकायत की है कि ऐप के जरिए उन्हें कम पैसे मिल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, एयरपोर्ट की एक राइड के लिए ड्राइवर को ₹350 मिल रहे हैं, जबकि वे बिना ऐप के इसी दूरी के ₹600 तक कमा लेते थे।

2. भुगतान में देरी (Payment Delays)

नकद की कमी: ओला-उबर की तरह इसमें भी भुगतान डिजिटल मोड में हो रहा है। ड्राइवरों का कहना है कि पहले 'काली-पीली' टैक्सी में उन्हें तुरंत नकद मिलता था जिससे दैनिक खर्च और ईंधन का काम चलता था। अब पेमेंट आने में देरी होने से उन्हें वित्तीय परेशानी हो रही है।

3. वेटिंग चार्ज और तकनीकी समस्याएं

टैक्स और हिडन चार्ज: दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में जब गाड़ी बॉर्डर पार करती है, तो MCD या एंट्री टैक्स ऐप के बिल में अपने आप नहीं जुड़ता। इससे ड्राइवरों को सवारी से अलग से पैसे मांगने पड़ते हैं, जिससे बहस और विवाद होता है।

वेटिंग और बिलिंग: तकनीकी खामियों के कारण वेटिंग चार्ज और अन्य अतिरिक्त शुल्कों की गणना में पारदर्शिता की कमी बताई जा रही है।

4. जबरन शामिल करने का आरोप

एयरपोर्ट पर चलने वाले कई 'काली-पीली' टैक्सी ड्राइवरों का आरोप है कि उन्हें इस नए सिस्टम में उनकी सहमति के बिना शामिल किया गया है। वे इसे 'सहकारी मॉडल' कम और 'थपा गया सिस्टम' ज्यादा मान रहे हैं।

5. यात्रियों की कमी

चूंकि ऐप नया है, इसलिए बुकिंग की संख्या ओला और उबर के मुकाबले काफी कम है। ड्राइवरों को लंबे समय तक राइड का इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी पूरे दिन की दिहाड़ी प्रभावित हो रही है।

क्या ओला-उबर को टक्कर देने का सपना टूट जाएगा?

विशेषज्ञों और ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, 'भारत टैक्सी' का मॉडल (0% कमीशन) ड्राइवरों के लिए कागजों पर बहुत अच्छा है, लेकिन इसकी सफलता दो चीजों पर टिकी है:

तकनीकी सुधार: अगर ऐप ओला-उबर की तरह स्मूथ नहीं हुआ और टैक्स/वेटिंग चार्ज जैसी समस्याओं को हल नहीं किया गया, तो ड्राइवर इससे दूर हो जाएंगे।

किराया संतुलन: यदि किराया यात्रियों के लिए बहुत महंगा (जैसा कुछ रिपोर्ट्स में दावा है) और ड्राइवरों के लिए बहुत कम रहा, तो यह प्लेटफॉर्म अपनी साख खो सकता है।

फिलहाल, ड्राइवरों के विरोध और तकनीकी शुरुआती बाधाओं (Teething troubles) ने इस 'देसी विकल्प' की राह को कठिन बना दिया है। यदि सरकार और सहकारी समितियां ड्राइवरों की इन मांगों (न्यूनतम किराया और तत्काल भुगतान) पर ध्यान नहीं देती हैं, तो ओला-उबर के एकाधिकार को चुनौती देना मुश्किल होगा।