महात्मा गांधी पर निबंध लिखा और कम हो गई रेप की सजा ;बॉम्बे हाई कोर्ट का हैरान करने वाला फैसला !

Wrote an essay on Mahatma Gandhi, got his rape sentence reduced! A surprising judgment by the Bombay High Court has left everyone talking. Is reformation more important than punishment

महात्मा गांधी पर निबंध लिखा और कम हो गई रेप की सजा ;बॉम्बे हाई कोर्ट का हैरान करने वाला फैसला !

यह सुनने में किसी फिल्मी पटकथा जैसा लग सकता है, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट का यह हालिया फैसला वास्तव में कानून और सुधार के बीच के संतुलन पर एक नई बहस छेड़ चुका है। कोर्ट ने एक रेप दोषी की सजा सिर्फ इसलिए कम कर दी क्योंकि उसने जेल में रहते हुए महात्मा गांधी के विचारों पर आधारित परीक्षा दी और अच्छे संस्कार दिखाए।

यहाँ इस पूरे मामले और कोर्ट के तर्क का विस्तृत विवरण दिया गया है:


क्या था पूरा मामला?

यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था जिसे एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के आरोप में दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत ने उसे कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। दोषी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी सजा के खिलाफ अपील की थी।

सुनवाई के दौरान, कोर्ट के सामने कुछ ऐसे तथ्य आए जिन्होंने जज का ध्यान खींचा:

  • गांधीवादी विचारधारा की परीक्षा: दोषी ने जेल में रहने के दौरान महात्मा गांधी के जीवन और उनके सिद्धांतों पर आधारित एक औपचारिक परीक्षा दी थी।

  • सुधारात्मक व्यवहार: जेल प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, दोषी का व्यवहार अन्य कैदियों की तुलना में काफी शांत और सुधारात्मक रहा था।


कोर्ट का चौंकाने वाला तर्क

बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि न्याय का उद्देश्य केवल "सजा देना" नहीं, बल्कि अपराधी को "सुधारना" भी है। कोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे:

  1. हृदय परिवर्तन: कोर्ट ने माना कि गांधीवादी सिद्धांतों पर परीक्षा देना और उसमें सफल होना इस बात का संकेत है कि व्यक्ति अपनी गलतियों पर पछतावा कर रहा है और खुद को बदलना चाहता है।

  2. सुधार की संभावना: यदि किसी अपराधी में सुधार के स्पष्ट लक्षण दिख रहे हैं, तो कानून उसे समाज में वापस लौटने का एक मौका दे सकता है।

  3. सजा में कटौती: इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने उसकी जेल की अवधि को कम कर दिया, ताकि वह एक बेहतर नागरिक बनकर बाहर निकल सके।


कानून बनाम नैतिकता: एक बड़ी बहस

इस फैसले ने कानूनी गलियारों और सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा शुरू कर दी है:

पक्ष तर्क
समर्थन में जेलों का प्राथमिक उद्देश्य अपराधी का पुनर्वास (Rehabilitation) होना चाहिए। गांधीवादी विचार किसी को भी अहिंसा और सत्य की राह दिखा सकते हैं।
विरोध में गंभीर अपराधों (जैसे रेप) में केवल "अच्छे व्यवहार" के आधार पर सजा कम करना पीड़ित के साथ अन्याय है। इससे अपराधियों में कानून का डर कम हो सकता है।

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला यह याद दिलाता है कि भारतीय न्यायपालिका कभी-कभी 'दंडात्मक न्याय' (Punitive Justice) से ऊपर उठकर 'सुधारात्मक न्याय' (Reformative Justice) को प्राथमिकता देती है।