क्या भारत में आने वाला है सेल्फ-ड्राइविंग और सुपर-स्मार्ट कारों का दौर ?
सरकार ने ऑटोमोटिव रडार (77GHz-81GHz) और कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी (5.9GHz) के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। पहली नजर में यह सिर्फ एक पॉलिसी चेंज लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह भारत को सेफ, स्मार्ट और फ्यूचरिस्टिक मोबिलिटी की ओर ले जाने वाला एक क्रांतिकारी कदम है।
यह लेख वास्तव में भारत के ऑटोमोटिव सेक्टर के एक बहुत बड़े और दूरगामी फैसले को रेखांकित करता है। पहली नजर में यह सिर्फ एक सरकारी अधिसूचना या 'रेड टेप' (लाल फीताशाही) को कम करने जैसा लग सकता है, लेकिन गहराई से देखें तो यह भारत में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी की पूरी तस्वीर बदलने वाला है।
1. तकनीक और सुरक्षा अब महंगी कारों तक सीमित नहीं रहेगी
अब तक भारत में बिकने वाली महंगी या प्रीमियम कारों में ही रडार-बेस्ड सेफ्टी फीचर्स (जैसे- ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, अडेप्टिव क्रूज कंट्रोल) मिलते थे। इसकी एक बड़ी वजह लाइसेंसिंग की जटिल प्रक्रिया और उससे बढ़ने वाली लागत थी।
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नतीजा: लाइसेंस हटने से निर्माण लागत (Manufacturing Cost) कम होगी। अब बजट और मिड-रेंज कारों में भी एडवांस रडार सिस्टम देखने को मिलेंगे, जिससे आम आदमी के लिए भी सड़कें सुरक्षित होंगी।
2. 'ग्लोबल स्टैंडर्ड' वाले वाहन अब भारत में
77GHz से 81GHz और 5.9GHz बैंड्स पूरी दुनिया में ऑटोमोटिव रडार और V2X (Vehicle-to-Everything) कम्युनिकेशन के लिए स्टैंडर्ड माने जाते हैं।
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नतीजा: विदेशी कार निर्माताओं को अब भारतीय बाजार के लिए अपनी तकनीक में अलग से बदलाव या 'डाउनग्रेड' करने की जरूरत नहीं होगी। जो तकनीक अमेरिका या यूरोप में चल रही है, उसे सीधे भारतीय कारों में फिट किया जा सकेगा। इससे 'टाइम-टू-मार्केट' (तकनीक को बाजार में लाने का समय) बहुत कम हो जाएगा।
3. कनेक्टेड और सेल्फ-ड्राइविंग कारों की नींव
5.9GHz बैंड का लाइसेंस-फ्री होना भारत में V2X (व्हीकल-टू-एवरीथिंग) इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होगा। इसका मतलब है:
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V2V (Vehicle-to-Vehicle): कारें आपस में बात कर सकेंगी (जैसे- आगे वाली कार अचानक ब्रेक लगाएगी, तो पीछे वाली कार को तुरंत सिग्नल मिल जाएगा)।
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V2I (Vehicle-to-Infrastructure): कारें सड़क किनारे लगे ट्रैफिक सिग्नल या स्मार्ट खंभों से कम्युनिकेट कर सकेंगी (जैसे- रेड लाइट होने से पहले ही कार की स्क्रीन पर अलर्ट आ जाना)।
एक बड़ा बदलाव: भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ सड़क दुर्घटनाएं और उनमें होने वाली मौतें बहुत ज्यादा हैं। सरकार का यह 'टेक्निकल' फैसला आने वाले 5 से 10 सालों में भारत की सड़कों को स्मार्ट, हादसों से मुक्त और पूरी तरह से कनेक्टेड बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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